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spirituality In Hindi

या देवी सर्वभूतेषु मा गौरी रूपेण संस्थिता

या देवी सर्वभूतेषु मा गौरी रूपेण संस्थिता

मां भगवती ही इस सृष्टि के उत्पत्ति, पालन और संहार की परम कारण हैं

सर्व चैतन्य रूपां तां आद्यां विद्यां च धीमहि

सर्व चैतन्य रूपां तां आद्यां विद्यां च धीमहि

मां जगदम्बा सभी प्राणियों के भीतर चैतन्य रूप में विद्यमान है

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता

जो देवी सब प्राणियों में चेतना कहलाती हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारंबार...

देवि पूजि पद कमल तुम्हारे

देवि पूजि पद कमल तुम्हारे

ऐश्वर्यस्य समग्रस्य,   धर्मस्य यशस: श्रिय:।   ज्ञान वैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतीरिणा।।

श्रीमद्भगवद्गीता और भगवान श्री कृष्ण के भक्त

श्रीमद्भगवद्गीता और भगवान श्री कृष्ण के भक्त

आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ

महात्मा और सिद्ध पुरूष को कैसे पहचानें

महात्मा और सिद्ध पुरूष को कैसे पहचानें

हंस की विशेषता होती है कि वह क्षीर नीर विवेकी होता है। यदि दुग्ध को जल से मिश्रित...

सगुण साकार भगवान में मन रमाएँ

सगुण साकार भगवान में मन रमाएँ

हृदय से जब जाहुगे, मर्द कहौंगो तोहिं

श्रद्धा से तो भक्त भी कर सकता है भगवान पर शासन

श्रद्धा से तो भक्त भी कर सकता है भगवान पर शासन

मोरे मन प्रभु अस विश्वासा, राम ते अधिक राम कर दासा

प्रेम में लीन होना ही परम ज्ञान की प्राप्ति है

प्रेम में लीन होना ही परम ज्ञान की प्राप्ति है

सोह न राम प्रेम बिनु ज्ञानू करनधार बिनु जिमि जलजानू

प्राणिमात्र के लिए अंतर-आत्मा क्या है

प्राणिमात्र के लिए अंतर-आत्मा क्या है

गुणरहितं कामनारहितं, प्रतिक्षणवर्धमानं अविच्छिन्नं, सूक्ष्मतरं अनुभवरूपं प्रेमस्वरूपं

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