रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा रैकेट का भंडाफोड़, 18.45 लाख नकद के साथ 4 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर के कबीर नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा गिरोह का भंडाफोड़ कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में 18.45 लाख रुपये नकद, सात मोबाइल और 25 एटीएम कार्ड जब्त हुए।

Updated: Feb 12, 2026, 12:11 PM IST

रायपुर। राजधानी रायपुर के कबीर नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चलाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान 18 लाख 45 हजार रुपये नकद, सात मोबाइल फोन, 25 एटीएम/डेबिट/क्रेडिट कार्ड और बैंक से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार, 11 फरवरी की शाम मुखबिर से सूचना मिली थी कि तिरंगा चौक फेस 2, कबीर नगर के पास कुछ युवक ऑनलाइन सट्टा वेबसाइटों के माध्यम से क्रिकेट सट्टा चला रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एएसआई घनश्याम साहू के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी की और मौके पर दबिश दी।

कार्रवाई के दौरान दीपक सचदेवा (30), गौरव सचदेवा (29) और ऋषभ रंगलानी (30) को मौके से पकड़ा गया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने ramco777.com, wood777.com और powerexch.com जैसी वेबसाइटों के जरिए सट्टा चलाने के काम को स्वीकार किया। पुलिस को संदेह है कि ये वेबसाइट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़े स्तर पर लेन देन और सट्टेबाजी का माध्यम बनी हुई थीं।

तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में नकदी, आईफोन सहित अन्य मोबाइल हैंडसेट, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। बरामद सामग्री से संकेत मिलता है कि सट्टा नेटवर्क संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था और बैंकिंग चैनलों का उपयोग लेन देन के लिए किया जा रहा था।

पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने ओम खेमानी (30) को भी हिरासत में लिया है। उसके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड जब्त किए गए हैं। पुलिस अब यह खंगाल रही है कि इन खातों के जरिए कितनी रकम का लेन देन हुआ और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं।

चारों आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 112(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जब्त मोबाइल और बैंक दस्तावेजों की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क के पूरे दायरे और संभावित अन्य आरोपियों का पता लगाया जा सके।