देशभर में श्रमिक संगठनों का हड़ताल, नए लेबर लॉ के खिलाफ सड़कों पर उतरे कर्मचारी
साल 2025 में लागू हुए चार नए श्रम कानून के विरोध में ट्रेड यूनियन प्रदर्शन करेगी। उनका आरोप है कि यह नए कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं साथ ही कंपनी को कर्मचारियों को निकालने की खुली छूट देते हैं।
नई दिल्ली। नए लेबर लॉ समेत कई मुद्दों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठन आज देशभर में हड़ताल कर रहे हैं। साल 2025 में लागू हुए चार नए श्रम कानून के विरोध में ट्रेड यूनियन की ओर से देशभर में हड़ताल का आह्वान किया गया है। ट्रेड यूनियन का आरोप है कि यह नए कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं साथ ही कंपनी को कर्मचारियों को निकालने की खुली छूट देते हैं।
मध्य प्रदेश के जबलपुर और इटारसी में डिफेंस फैक्टरियों के सामने कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इटारसी में एक घंटा विरोध करने के बाद कर्मचारी काम पर लौट गए। हड़ताल में ट्रेड यूनियन के संयुक्त मोर्चा- आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, बैंक, बीमा, केंद्रीय कर्मचारी, बीएसएनएल के संगठन शामिल हैं।
मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया, हड़ताल में सरकारी के साथ प्राइवेट बैंक भी शामिल हैं। भारतीय स्टेट बैंक यूनियन ने हड़ताल का समर्थन किया है, लेकिन वह सीधे तौर पर हड़ताल में शामिल नहीं है। भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। वहीं, बीएसएनएल-डाक विभाग में भी हड़ताल का असर है।
ग्वालियर में ट्रेड यूनियन की हड़ताल के कारण पीएनबी की कुछ शाखाएं बंद रहीं, जबकि स्टेट बैंक व अन्य प्राइवेट बैंकों में लोग काम करते हुए नजर आ रहे हैं। पीएनबी की कुछ शाखाएं बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक के बाहर भोपाल से आए युवराज शर्मा ने बताया कि उन्हें जानकारी ही नहीं थी कि इस तरह की कोई हड़ताल है, क्योंकि अधिकांश बैंक खुले हुए हैं। भोपाल जाने का वापसी टिकट भी बनवा लिया था, लेकिन अब तक काम नहीं हुआ है।
संगठनों की प्रमुख मांगें
* चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द करने की मांग।
* ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेने की मांग।
बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग।
* SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस लेने की मांग।
* मनरेगा की बहाली की मांग।
* विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को रद्द करने की मांग।




