स्पेन में अवैध रूप से घुसने पहुंचे 49 हजार प्रवासी, रोकने की कोशिश में मची भगदड़, 18 की मौत

स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी शहर स्यूटा की सीमा पर गुरुवार तड़के करीब 3 हजार प्रवासियों के जबरन घुसने से भयंकर भगदड़ मच गई। इस हादसे में 18 प्रवासियों की दर्दनाक मौत हो गई।

Updated: Jul 31, 2026, 05:09 PM IST

स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी शहर स्यूटा (Ceuta) की सीमा पर गुरुवार तड़के बड़ी त्रासदी हो गई। वहां हजारों अफ्रीकी प्रवासियों ने एक साथ स्पेन में प्रवेश करने की कोशिश की। भीड़ बेकाबू होने से सीमा पर भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में कम से कम 18 प्रवासियों की मौत हो गई। इस दौरान सीमा सुरक्षा अभियान में शामिल स्पेन और मोरक्को के 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 3 हजार प्रवासियों ने एक साथ सीमा पार करने का प्रयास किया था। सीमा पर लगी ऊंची सुरक्षा बाड़, पुलिस की घेराबंदी और संकरे रास्तों के कारण भारी अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े। जबकि, कई लोग समुद्र के रास्ते सीमा पार करने की कोशिश में डूब गए।

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स्पेनिश सरकार ने बताया कि हाल के दिनों में मोरक्को की ओर से करीब 49 हजार लोग तैरकर या पैदल चलते हुए स्पेन के स्यूटा शहर में प्रवेश कर चुके हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सैन्य बल तैनात किए गए हैं, हवाई और नौसैनिक निगरानी बढ़ाई गई है तथा समुद्री रास्तों से आने वाले प्रवासियों पर नजर रखने के लिए गोताखोरों की विशेष टीमों को भी लगाया गया है। यूरोपीय संघ (EU) ने भी इस संकट से निपटने के लिए स्पेन को सहयोग देने की पेशकश की है।

स्पेन सरकार के अधिकारी फर्नांडो रोड्रिगेज कॉन्ट्रेरास ने कहा कि शुरुआती आकलन के अनुसार, हजारों और संभव है कि कई दस हजार लोग एक साथ मोरक्को से स्यूटा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। इसी वजह से सीमा पर अभूतपूर्व दबाव की स्थिति बन गई।

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विशेषज्ञों के अनुसार, अफ्रीका और एशिया के कई देशों के लोग बेहतर रोजगार, सुरक्षा और जीवन स्तर की उम्मीद में यूरोप पहुंचने का प्रयास करते हैं। स्यूटा उनके लिए सबसे अहम प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह भौगोलिक रूप से अफ्रीका में स्थित होने के बावजूद स्पेन और यूरोपीय संघ का हिस्सा है। इसका मतलब है कि स्यूटा में प्रवेश करने वाला व्यक्ति यूरोप की सीमा तक पहुंच जाता है।

इसी कारण हर साल हजारों प्रवासी स्यूटा के रास्ते यूरोप में दाखिल होने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग समुद्र में तैरकर सीमा पार करते हैं, कुछ छोटी नावों का सहारा लेते हैं। जबकि, बड़ी संख्या में लोग सीमा पर लगी ऊंची बाड़ को पार करने या काटने का प्रयास करते हैं। इसी सप्ताह की शुरुआत में भी लगभग 1,500 लोग स्यूटा में प्रवेश कर चुके थे। जिसके बाद गुरुवार को स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

स्यूटा पहले भी बड़े प्रवासी संकट का केंद्र रहा है। साल 2021 में केवल दो दिनों के भीतर 10 हजार से अधिक लोग इस शहर में घुस आए थे। वहीं, 2022 में मेलिला सीमा पर प्रवेश की कोशिश के दौरान हुई भगदड़ में कम से कम 23 प्रवासियों की मौत हो गई थी।

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स्यूटा और मेलिला को लेकर स्पेन और मोरक्को के बीच लंबे समय से विवाद भी बना हुआ है। साल 1956 में मोरक्को को स्पेन से स्वतंत्रता मिलने के बावजूद स्यूटा और मेलिला स्पेन के नियंत्रण में रहे। मोरक्को इन दोनों शहरों पर अपना दावा जताता है और उन्हें अपना हिस्सा मानता है। जबकि, स्पेन का कहना है कि स्यूटा पर उसका नियंत्रण सदियों पुराना है और यह उसके संप्रभु क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है।

इतिहास के अनुसार, स्यूटा पर सबसे पहले 1415 में पुर्तगाल ने कब्जा किया था। बाद में 1668 में यह शहर स्पेन के अधिकार में आ गया। स्पेन इस रणनीतिक क्षेत्र को छोड़ने के पक्ष में नहीं है क्योंकि यह जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के निकट स्थित है और भूमध्य सागर तथा अटलांटिक महासागर के बीच होने वाले समुद्री यातायात पर नजर रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा स्पेन का मानना है कि यदि स्यूटा छोड़ा गया तो मेलिला पर भी दबाव बढ़ेगा। वहीं, स्यूटा के अधिकांश निवासी स्वयं को स्पेनिश नागरिक मानते हैं और स्पेन के साथ ही बने रहना चाहते हैं।

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