दफ्तर दरबारी: बीजेपी के पूर्व मंत्री ने जहां जताई थी आपत्ति वहां अफसर ने कमाए करोड़ों

MP Politics: एमपी को फख्र है कि यहां के अफसर केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते आए हैं। यहां के अफसरों और उनकी योजनाओं का लोहा पूरे देश ने माना है। लेकिन इनदिनों एमपी के अफसर खास कारण से चर्चा में हैं और यह चर्चा बदनामी का सबब बन गई है। 

Updated: May 16, 2026, 02:29 PM IST

जब भी किसी अवैध काम को वैध करने का मामला आता है तो कहा जाता है कि समर्थ को कोई दोष नहीं होता। नेता व अफसर के साथ मिल कर व्यापारी अक्सर ऐसा समर्थ गठजोडृ बनाते आए हैं ताकि सबका भला हो जाए। मगर इन दिनों देशभर में अफसरों के ऐसे कारनामे की धूम है जिसे देख कर नेता और व्यापारी बिल्डर्स भी दंग हैं। खासबात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर ही आपत्ति जताते हुए बीजेपी के पूर्वमंत्री दीपक जोशी ने मोर्चा खोल दिया था। 

यह मामला भोपाल के कोलार इलाके के गुराड़ी घाट में 50 से अधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारियों द्वारा जमीन खरीदने से जुड़ा है। इन अफसरों ने 2022 में लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि महज 82 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से करीब 5.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। जमीन खरीदन के महज 16 महीने बाद अगस्त 2023 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 3,200 करोड़ के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई। यह बायपास इन अधिकारियों की जमीन से केवल 500 मीटर की दूरी से गुजरता है। जून 2024 में इस जमीन का उपयोग कृषि से बदलकर आवासीय कर दिया गया और जमीन की कीमत करोड़ों में पहुंच गई। आईएएस कुछ माह में करोड़पति बन गए। यह सबकुछ इतने सुनियोजित ढंग से हुआ कि किसी एक को दोष भी नहीं दिया जा सकता है। 

अपने प्रोजेक्ट के पास से सड़क निकलवाने या हटवाने जैस खेल तो बिल्डर्स बरसों से करते आए हैं। नेताओं ने भी प्रोजेक्ट के अनुसार जमीन की खरीद-फरोख्त की है। यही कारण है कि भोपाल-इंदौर जैसे महानगर बनने को आतुर शहरों का मास्टर प्लान 20 सालों से अटका है। कभी नेता इसमें अड़ंगा लगा देते हैं तो कभी अफसर। कहा जाता है कि जब जो बिल्डर लॉबी ताकत में होती है, वह अपने अनुसार प्लान बदलवा लेती है। लेकिन इस बार अफसरों ने वेस्टर्न बायपास को लेकर खेला कर दिया। बीजेपी के पूर्व मंत्री दीपक जोशी इस बायपास का मुखर विरोध करते रहे हैं लेकिन जबलपुर से भोपाल-इंदौर के बीच के इस रास्ते पर उगी मुनाफे की फसल के आगे सारे विरोध, सारी नैतिकता किनारे कर दिए गए हैं। भ्रष्ट आचरण का यह मामला खुल गया अन्यथा ऐसे दर्जनों किस्से फाइलों और कनकहियों में दर्ज हैं। अब आवासीय जमीन पर इमारतें तानने का काम होगा तो नेता, अफसर और बिल्डर्स का गठजोडृ ही काम आएगा। 

क्या होने वाली आईएएस को रिश्वतकांड में बचाया?

यूपीएससी की 2025 में आयोजित परीक्षा में 249 ऑल इंडिया रैंक पाने वाली तेंदूखेड़ा की एसडीएम पूजा सोनी जल्द ही आईएएस अधिकारी बनने वाली हैं। इससे पहले कि वे ट्रेनिंग पर जाएं उनके खिलाफ रिश्वत का एक आरोप खडा हो गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर की टीम ने तेंदूखेड़ा एसडीएम ऑफिस के स्टेनो सौरभ यादव को 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। स्टेनो ने निरीक्षण रिपोर्ट देने की एवज में रुपए की मांग की थी। उसके 

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदक इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। शिकायतकर्ता का दावों है कि सौदेबाजी के दौरान स्टेनो सौरभ यादव ने पैसों के बंटवारे को लेकर साफ कहा था कि 30 हजार की रकम में से 5 हजार उसके अपने काम के हैं, जबकि बाकी के 25 हजार ‘ऊपर’ भेजने होंगे। इस ‘ऊपर’ शब्द का इशारा सीधे तौर पर एसडीएम की कुर्सी की तरफ माना जा रहा है।

आवेदक संजय राय ने मीडिया के सामने तेंदूखेड़ा एसडीएम पूजा सोनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया खबरों के अनुसार खुद को निर्दोष बताते हुए एसडीएम पूजा सोनी ने शिकायतकर्ता पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अक्सर 'सेवा करने' की बात पूछता था, जिस पर उन्होंने हमेशा मना किया, लेकिन जब उसने बाबू के लिए पूछा तो उन्होंने कह दिया था कि 'वो तुम देख लो'। पूजा सोनी ने सिस्टम पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति काम होने की खुशी में किसी को चाय-पानी करा देता है, तो वह उसमें दखल नहीं देतीं। 

एक जिम्मेदार अधिकारी का अपने अधीनस्थ भ्रष्टाचार को चाय-पानी कह कर छूट दे देना ही आपत्तिजनक हैं। जहां वे दखल नहीं देने की बात कह रही हैं वहीं उन्हें सबसे पहले सख्ती दिखानी थी। इसीलिए आरोप लग रहा है कि एसडीएम पूजा सोनी जल्द आईएएस बनने वाली है इसलिए स्टेनो को आगे कर अफसर को बचा लिया गया हैं। 

एक्शन वाले कलेक्टर के लिए सोशल मीडिया मुहिम

कभी शिवराज सरकार में रतलाम कलेक्टर रहते हुए सरकार की अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला काम करने वाले आईएएस नरेंद्र सूर्यवंशी को फिर से कलेक्टर बनाया गया है। थोडे समय लूप लाइन में रहने के बाद रीवा कलेक्टर बना कर भेजे गए प्रमोटी आईएएस नरेंद्र सूर्यवंशी ने पद संभालते ही ऐसी सख्ती दिखाई कि कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर हो गए। देरी से आने पर कर्मचारियों को दफ्तर के बाहर लाइन में खड़ा कर फटकारना, लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनाने जैसे आरोप लगा कर कर्मचारी आंदोलन कर चुके हैं। 

कर्मचारियों के इस बर्ताव को देखते हुए अब कलेक्टर के समर्थन में सोशल मीडिया पर मुहिम चल पड़ी है। अलग-अलग ग्रुप में ही नहीं लोग सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत पोस्ट कर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के काम की प्रशंसा कर रहे हैं। इस पोस्ट में लिखा जा रहा है कि बहुत दिनों बाद रीवा में ऐसा कलेक्टर आया है जिसने कर्मचारियों पर सख्ती दिखाई है।  

पूर्ववर्ती अफसरों का उल्लेख कर बताया जा रहा है कि सिस्टम में बैठे लोग जो काम 10 साल में नहीं कर पाए, सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायतों की जो अधिकारी एक-एक महीने तक जांच नहीं कर रहे थे, वे लोग धूप में चार-चार घंटे खड़े होकर भी सालो का काम 1 घंटे में पूरा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को बेहतर अधिकारी बताते हुए कहा जा रहा है कि कर्मचारियों का कंफर्ट जोन टूटा है इसलिए वे कलेक्टर का विरोध कर रहे हैं।

डीआईजी आईपीएस मैडम बनेंगी सिपाही 

डीआईजी पद पर पदोन्नत हुई आईपीएस सिमला प्रसाद सिपाही बनने जा रही हैं। बात तो चौंकाने वाली है। ऐसा क्या हुआ कि उनका डिमोशन नहीं हो रहा है? नहीं, आईपीएस सिमला प्रसाद का रीयल लाइफ में डिमोशन नहीं हो रहा है बल्कि वे रील लाइफ में सिपाही बन रही हैं। जी हां, फिल्म “दि नर्मदा स्टोरी” में आईपीएस सिमला प्रसाद सिपाही के किरदार में दिखाई देंगी। बीते कुछ समय पहले शूटिंग के कारण चर्चा में आई यह सस्पेंस थ्रिलर ड्रामा फिल्म 12 जून को रिलीज हो रही है। फिल्म में बुंदेलखंड के ख्यात अभिनेता मुकेश तिवारी और दिग्गज कलाकार रघुवीर यादव अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।