दूध में यूरिया, आइसक्रीम में डिटर्जेंट, संसद उठा खाद्द पदार्थों में मिलावटखोरी का मुद्दा

राज्यसभा में आप सांसद राघव चड्ढा ने खाने में मिलावट का मुद्दा उठाया। चड्ढा ने इसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बताते हुए FSSAI को मजबूत करने और मिलावटखोरों पर सख्त एक्शन की मांग की।

Updated: Feb 05, 2026, 07:26 PM IST

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने देश में खाद्य मिलावट को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़ा किया। इसी के साथ उन्होंने इसे भारत का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बताया है। बुधवार को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में शुद्धता के नाम पर खुलेआम जहर बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूध से लेकर मसाले, तेल, पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थ तक में केमिकल, अत्यधिक नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट मिलाए जा रहे हैं। जबकि, कंपनियां इन उत्पादों को स्वास्थ्य और ऊर्जा बढ़ाने वाला बताकर बेच रही हैं।

सदन में बोलते हुए चड्ढा ने एक-एक कर कई खाद्य पदार्थों में मिलावट के उदाहरण गिनाए। उन्होंने दावा किया कि दूध में यूरिया मिलाया जा रहा है, सब्जियों को ताजा दिखाने के लिए ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल किया जा रहा है, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा मिलाया जाता है, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर मिलाया जा रहा है, फलों के जूस में सिंथेटिक पाउडर और आर्टिफिशियल रंग मिलाए जा रहे हैं, खाद्य तेल में मशीन का तेल मिलाया जा रहा है और मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा तक मिलाया जा रहा है। 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड का उपयोग किया जा रहा है और कई मिठाइयां शुद्ध घी के नाम पर वनस्पति तेल और डालडा से बनाई जा रही हैं। चड्ढा ने यह भी कहा कि शहद में पीला रंग मिलाया जाता है और कई उत्पादों में भ्रामक लेबलिंग कर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है।

राघव चड्ढा ने संसद में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि देश में दूध के 71 प्रतिशत सैंपल में यूरिया पाया गया है। जबकि, 64 प्रतिशत सैंपल में सोडियम बाइकार्बोनेट जैसे न्यूट्रलाइजर मौजूद मिले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में जितना दूध उत्पादन होता है उससे कहीं अधिक मात्रा में दूध बाजार में बिक रहा है जो मिलावट के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि आम परिवार खासकर मांएं अपने बच्चों को पोषण देने के लिए दूध पिलाती हैं लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं होता कि वह अपने बच्चों को मिलावटी और खतरनाक पदार्थों वाला दूध दे रही हैं।

चड्ढा ने सब्जियों में ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल को भी गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि यह एक हानिकारक रसायन है जिससे चक्कर आना, सिरदर्द, हार्ट फेलियर, बांझपन और कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक साबित हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि साल 2014 से लेकर 2025 के बीच जांच किए गए खाद्य नमूनों में से 25 प्रतिशत सैंपल मिलावटी पाए गए हैं। इसका मतलब है कि हर चार में से एक खाद्य पदार्थ मिलावटी हैं। उन्होंने कहा कि इस मिलावट के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं और कई मामलों में जान तक गंवा रहे हैं।

आप सांसद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित भारतीय खाद्य उत्पादों का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि देश की दो बड़ी मसाला कंपनियों के उत्पादों को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के कई देशों में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों की मौजूदगी के कारण प्रतिबंधित किया गया था लेकिन वही उत्पाद भारत में खुलेआम बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन चीजों को विदेशों में असुरक्षित मानकर प्रतिबंधित कर दिया जाता है उन्हें भारतीय उपभोक्ताओं को बिना पर्याप्त जांच और नियंत्रण के उपलब्ध कराया जा रहा है जो एक गंभीर लापरवाही है।

सरकार पर दबाव बनाते हुए राघव चड्ढा ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को मजबूत किया जाए, उसके कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं को विकसित किया जाए ताकि मिलावटी खाद्य पदार्थों की प्रभावी जांच हो सके। उन्होंने मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त दंड और भारी आर्थिक जुर्माना लगाने की मांग भी की ताकि ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके। इसके अलावा उन्होंने सार्वजनिक रिकॉल सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव रखा जिसके तहत मिलावटी उत्पादों को सार्वजनिक रूप से चिन्हित कर बाजार से तुरंत हटाया जाए और कंपनियों के भ्रामक स्वास्थ्य दावों पर रोक लगाई जा सके।