इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 32वीं मौत, 65 वर्षीय महिला ने बॉम्बे हॉस्पिटल में तोड़ा दम

भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में एक और मौत दर्ज की गई है। 65 वर्षीय अनिता कुशवाह ने बॉम्बे हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे में अब तक 32 लोगों की जान जा चुकी है।

Updated: Feb 02, 2026, 11:23 AM IST

इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी ने एक और जान ले ली है। इस हादसे में 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की रविवार रात मौत हो गई। वे पिछले एक महीने से अधिक समय से बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती थीं और वहां उनका इलाज चल रहा था। लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद उन्होंने रविवार को दम तोड़ दिया। इस मौत के साथ ही दूषित पानी हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है।

परिजनों के अनुसार, अनिता कुशवाह को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। उनके बेटे नीलेश ने बताया कि 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें भाग्यश्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। दो दिन बाद हालत में सुधार होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर घर लाया गया लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर तबीयत फिर बिगड़ गई। इसके बाद 1 जनवरी को उन्हें अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया।

अरबिंदो हॉस्पिटल में शुरुआती इलाज के बाद 4 जनवरी को उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। यहां इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। संक्रमण के असर से उनकी किडनी फेल हो गई जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस करनी पड़ी। बाद में उन्हें वेंटिलेटर पर भी शिफ्ट किया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया जिससे उनकी स्थिति और नाजुक हो गई।

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से मरीज को हायर सेंटर में सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराया गया लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अनिता कुशवाह के परिवार में उनके पति के अलावा एक बेटा और दो बेटियां हैं। उनका अंतिम संस्कार आज यानी सोमवार को किया जाएगा।

भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे की तस्वीर अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। अब तक 450 से ज्यादा मरीज इलाज के बाद ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं लेकिन तीन मरीज अभी भी भर्ती हैं। इनमें से दो मरीज आईसीयू में हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

हालात को देखते हुए क्षेत्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 24 घंटे चालू रखा गया है। हालांकि, डायरिया के नए मामलों में अब काफी कमी आई है। रोजाना एक या दो मरीज ही आ रहे हैं और उन्हें भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। एहतियात के तौर पर इलाके में दो एम्बुलेंस भी तैनात की गई हैं।

पानी की सप्लाई को लेकर निगम का कहना है कि फिलहाल एक दिन छोड़कर इलाके के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है और पानी साफ आ रहा है। इसके बावजूद स्थानीय रहवासी अब भी आरओ और टैंकर के पानी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। बाकी बचे 70 प्रतिशत इलाके में मुख्य पाइपलाइन का काम अंतिम चरण में है। काम पूरा होने के बाद लीकेज टेस्ट किया जाएगा और पानी के सैंपल लेकर गुणवत्ता की जांच की जाएगी।