MP: पांढुर्णा के गोटमार मेले में खूनी परंपरा फिर शुरू, पथराव में अब तक 497 लोग घायल, 700 जवान तैनात

घायलों के इलाज के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है और 22 एंबुलेंस तैनात की गई हैं।

Updated: Sep 11, 2026, 03:16 PM IST

पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में पारंपरिक गोटमार मेले का आयोजन हो रहा है। मेले के दौरान जाम नदी के दोनों किनारों पर बसे पांढुर्णा और सावरगांव के लोग एक-दूसरे पर पथराव कर रहे हैं। झंडे पर कब्जे के लिए हो रहे इस भीषण पत्थरबाजी में दोपहर बाद तक 497 लोगों के घायल होने की सूचना है।

घायलों को मेला स्थल पर बनाए गए प्राथमिक चिकित्सा शिविरों में तुरंत उपचार दिया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने गंभीर मरीजों को तुरंत नागपुर जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर करने के लिए एंबुलेंस और डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की है।

पत्थरबाजी में 4 खिलाड़ियों को गंभीर चोट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सावरगांव निवासी 33 वर्षीय नितिन भादे का पैर टूट गया। 48 वर्षीय प्रह्लाद साहू के कंधे की हड्डी टूट गई। पांढुर्णा निवासी 39 वर्षीय सचिन हाटेकर का पैर टूट गया। सावरगांव निवासी 30 वर्षीय संजय धारपुरे के सिर और पैर में गंभीर चोट आई है। संजय और सचिन को नागपुर रेफर किया गया है।

घायलों के इलाज के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है और 22 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। घायलों को जरूरत के मुताबिक प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा जा रहा है। सदियों पुरानी इस परंपरा के दौरान सुरक्षा के लिए 700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेला क्षेत्र और आसपास 10 CCTV कैमरों और 3 ड्रोन से निगरानी की जा रही है। 

प्रशासन ने चोटों की गंभीरता को कम करने के लिए गुलेल के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि मेले में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। यानी पत्थर सिर्फ हाथ से ही चलाया जा सकता है। पांढुर्णा विधायक निलेश उईके ने कहा कि वे पिछले 10 साल से गोटमार खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोटमार मेले से लोगों की आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। 

बता दें कि गोटमार मेला लगभग 300 साल पुरानी एक अनूठी और खूनी परंपरा है, जो हर साल भाद्रपद मास की अमावस्या (पोला त्योहार के दूसरे दिन) को जाम नदी के तट पर आयोजित की जाती है। इस दौरान जाम नदी के दोनों किनारों पर बसे पांढुर्णा और सावरगांव के लोग एक-दूसरे पर पथराव करते हैं। गोटमार में विगत कुछ वर्षों में पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद परंपरा का हवाला देकर इस खूनी खेल को कभी रोका नहीं गया है।