जी भाईसाहब जीः ऐसे नेताओं का चरित्र बिगाड़ रहा है बीजेपी का चेहरा

MP Politics: मध्य प्रदेश बीजेपी नेताओं का चरित्र देख कर लगता है कि बीजेपी जिस चाल, चरित्र व चेहरे की ब्रांडिंग करती रही है, वही अब संकट में है। महिलाओं के विरूद्ध हिंसा के आंकड़े डराते हैं। इस हिंसा काे सत्ताधारी दल से जुड़े नेता ही अंजाम देंगे तो फिर राहत कहां मिलेगी?

Updated: Apr 01, 2026, 03:42 PM IST

देवास में बीजेपी के दो पदाधिकारियों के बीच कथित प्रेम प्रसंग ने राजनीति में उबाल आ गया है। सोशल मीडिया और स्थानीय खबरों में यह तेजी से वायरल हो रहा है। यूं तो यह मामला व्यक्तिगत है लेकिन पदाधिकारी होने के कारण बीजेपी संगठन के चेहरे पर दाग लग रहे हैं। बीजपी पदाधिकारी राजू सोनी की पत्नी ने 26 मार्च को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि उनके पति के बीजेपी नेत्री से संबंध हैं। इस कारण उनके बीच आए दिन विवाद होता था।

पत्नी ने बताया है कि 14 मार्च को बाजार में पति को उक्त महिला के साथ देखने पर विरोध किया तो रात में उनके साथ मारपीट की गई। पहले भी दोनों पक्ष थाने पहुंचे थे, जहां समझौता हुआ था। इसके बावजूद भी बीजपी नेता राजू सोनी ने बीजेपी नेत्री से संबंध जारी रखे। 25 मार्च को फिर से विवाद हुआ तो पत्नी को धमकी दी। मारपीट के वीडियो और कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। 26 मार्च को की गई शिकायत के बाद भी बीजेपी नेता के प्रभाव के चलते 31 मार्च तक कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई थी। मामला वायरल हुआ तो पुलिस ने राजू सोनी को गिरफ्तार कर लिया। 

यह एक मामला नहीं है। बीते एक साल में अनेक मामले सामने आए हैं जब बीजेपी नेताओं के चरित्र ने पार्टी को शर्मसार किया है। जैसे, जून 2025 में जबलपुर में एक हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाने और लड़कियों की तस्करी के आरोप में के पूर्व मंडल अध्यक्ष अतुल चौरसिया को गिरफ्तार किया गया था। उन पर लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर देह व्यापार में धकेलने और खुद भी बलात्कार करने के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। सतना में दिसंबर 2025 में बीजेपी पार्षद के पति और पूर्व पार्षद अशोक सिंह को एक महिला के साथ छेड़छाड़ करने और उसे जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। एक वायरल वीडियो में आरोपी को अपनी राजनीतिक ताकत का रौब दिखाते और महिला को डराते हुए देखा गया था। अप्रैल 2025 में में सीधी के बीजेपी जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह पर एक महिला ने यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी का आरोप लगाया। दिसंबर 2024 में विदिशा में बीजेपी जिला इकाई के पदाधिकारी योगेंद्र सोलंकी पर उनकी एक रिश्तेदार ने लंबे समय तक बलात्कार करने का आरोप लगाया, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

सितंबर 2024 में सागर में स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार के 'प्रतिनिधि' आशीष तिवारी पर एक 7 वर्षीय बच्ची के साथ यौन शोषण का आरोप लगा। एफआईआर दर्ज होने के बाद मंत्री ने उन्हें पद से हटा दिया था। मई 2024 का सागर−दमोह में हुआ दलित उत्पीड़न मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में जारी है। दमोह में बीजेपी युवा मोर्चा के नेता अंकित सिंह और अन्य पर एक दलित लड़की के यौन उत्पीड़न और बाद में उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के गंभीर आरोप लगे। 

मध्य प्रदेश देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में शीर्ष के पांच राज्यों में से एक है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की सबसे ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में साल 2023 में महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों के 32,342 मामले दर्ज किए गए थे। बीजेपी नेता अपनी सरकार के होने के प्रभाव के चलते अनेक आपराधिक गतिविधियों में संलग्न होते हैं तथा इन मामलों पर पुलिस पर दबाव बनाते हैं। मई 2025 में मंदसौर के बीजेपी नेता मनोहर लाल धाकड़ का कथित वीडियो वायरल हुआ था। हाई वे पर महिला के साथ आपत्तिजनक अवस्था के वीडियो के बाद भी पार्टी उन पर कार्रवाई करने से संकोच करती रही क्योंकि उनकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य है व राजनीतिक समीकरण धाकड़ के पक्ष में थे। इस तरह के कृत्यों से पार्टी पल्ला झाड़ लेती है लेकिन चाल, चरित्र और चेहरे का दंभ तो खत्म हो जाता है। 


सत्तन गुरु सुना सकते हैं, हम नहीं, हमारी पीड़ा कौन समझे

इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में कुर्सी न मिलने से लौट गए पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन की नाराजगी चर्चा में आ गई हैं। सत्तन गुरु मुखर हैं। संगठन ने उन्हें समझाने के प्रयास किए लेकिन वे खुल कर बोलते रहे हैं और इस बार भी खूब बोले हैं। 

बीते सप्ताह इंदौर की सियासत में एक छोटी सी चूक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई। नगर निगम के नर्मदा परियोजना के चौथे चरण के कार्यक्रम में जब सत्तन मंच पर पहुंचे तो अतिथियों की सूची में उनका नाम नहीं था। नाम न होने पर युवा कार्यकर्ता ने उन्हें बैठने से रोक दिया। जगह नहीं मिली तो सत्तन रूके नहीं व कार्यक्रम से लौट गए। देखते ही देखते उनके जैसे वरिष्ठ नेता के अपमान का मुद्दा इंदौर की सियासत में चर्चा का विषय बन गया। वरिष्ठ नेता और कवि सत्यनारायण सत्तन की नाराजगी ने जिला संगठन को एक पैर पर खड़ा कर दिया। अगले ही दिन बीजेपी के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा मनाने के लिए सत्तन गुरु के घर पहुंचे। खूब मनुहार की। उनके बड़प्पन का बखान कर कहा कि संगठन उनके बिना पूरा नहीं होता है। 

बंद कमरे में हुई बातचीत में क्या हुआ यह बाद में मीडिया से संवाद में खुल गया। जिलाध्यक्ष सुमित मिश्रा ने इस पूरे मामले को गलतफहमी बताते हुए कहा सत्तन गुरु पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। अगर कोई गलती हुई है तो हम 25 बार भी माफी मांगने को तैयार हैं। मगर जब पत्रकारों ने सवाल किए तो सत्तन गुरु ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। सत्तन ने कहा कि बीजेपी अब मेरी प्रासंगिकता नहीं मानती। महापौर ने मुझे दो बार बुलाया, लेकिन व्यवस्थाएं ठीक नहीं थीं। संगठनात्मक व्यवस्था कमजोर है। सत्तन गुरु ने यह भी कहा कि पुराने नेताओं ने ही नए लोगों को आगे बढ़ने के लिए तैयार किया है। 

इस पूरे घटनाक्रम ने बीजेपी संगठन की अंदरूनी कलह को भी सतह पर ला दिया है। प्रदेश में कई स्थानों पर वरिष्ठ नेता स्वयं को हाशिए पर अनुभव कर रहे हैं। बीजेपी में असंतुष्ट नेताओं के हाल बुरे हैं। दर्द की कोई सुनवाई नहीं, पद कब मिलेगा, कोई आश्वासन नहीं। कोई राह नहीं कि अपनी भड़ास कहां निकालें? ऐसे में जब सत्यनारायण सत्तन जैसे मुखर नेता के कहे से पार्टी ने कितना समझा यह अलग बात है लेकिन पद और सम्मान के इंतजार में हाशिए पर पड़े नेताओं की राहत मिली है कि कम से कम किसी ने तो हकीकत दिखाई।

ताकत बढ़ाने के लिए कांग्रेस की पंचायती योजना 

लंबे समय से सत्ता में रहते हुए बीजेपी में तमाम दोष जरूर आए हैं लेकिन संगठन के स्तर पर बीजेपी ने स्वयं को खूब मजबूत किया है। संगठन के मामले में कांग्रेस अपनी प्रतिस्पर्धी बीजेपी से पीछे ही रही है। अब संगठन को मजबूत करने की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस ने नई रणनीति बनाई है। बीजेपी की मोहल्ला कमेटी की टक्कर में कांग्रेस पंचायत कमेटियां बना रही है। कांग्रेस का आकलन है कि संगठन मजबूत नहीं होगा तथा अनुशासन तय नहीं होगा तब स्थिति नियंत्रित होगी अन्यथा कमजोर संगठन के सहारे चुनाव जीतना संभव नहीं होगा। कांग्रेस ने जिला व ब्लॉक कार्यसमितियों को बड़ा बनाने के जगह छोटी और प्रभावी बनाने पर बल दिया है।  

बीजेपी की बूथ कमेटियों को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ग्राम पंचायतों के वार्ड स्तर की समितियां बना रही है ताकि मैदान में उसकी ताकत बढ़ पाए। ग्राम पंचायत वार्डों की समितियों कामें करीब दस लोग होंगे। करीब 50 फीसदी युवाओं की भागीदारी इन समितियों में तय की जाएगी। इसी तरह शहरों में वार्ड स्तर पर समिति बनाने के बाद मोहल्ला स्तर पर समिति बनेगी। इसके बाद प्रत्येक मोहल्ले में 30 घरों के बीच एक समन्वयक बनाने की योजना है। यह पूरी तैयारी साल 2027 के नगरीय निकाय और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए की जा रही है। 2029 के लोकसभा चुनाव में भी हो यही कमेटियां काम करेंगी। 

मैदानी नेताओं का मनोबल व प्रभाव बढ़ाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तय किया है कि अब कांग्रेस ग्राम पंचायत के अध्यक्षों को मंच में स्थान दिया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि मंच और संगठन में जगह देने से माहौल बनाने में मदद मिल सकती है।

मन की बात में खुल दिल की गांठ?

इस सप्ताह एक तस्वीर चर्चा में रही। इस तस्वीर में प्रदेश भाजपा की राजनीति के दो अहम् किरदार हैं। एक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व दूसरे उनके कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय। यूं तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से राजनीति में वरिष्ठ हैं मगर मुखिया तो यादव हैं। वरिष्ठता के इस क्रम में मतभेद की खबरें आम हो जाती हैं। बीते दिनों इंदौर के भागीरथपुरा में मौताें के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय निशाने पर हैं। उनकी नाराजगी के अपने कारण हैं। यही वजह है कि वे दो बार मंत्रिपरिषद की बैठकों में शामिल भी नहीं हुए। 

इस बीच रविवार को जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर पहुंचे तो एक अलग नजारा हुआ। मुख्यमंत्री यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम मन की बात सार्वजिनक कार्यक्रम में सुना। कार्यकर्ताओं से भरे इस कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव अपने पास बैठे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से खूब बतियाते रहे। उस वक्त पार्टी के अन्य कार्यकर्ता मोदी के मन की बात सुनने में व्यस्त थे। 

माना गया कि कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल की गांठें खोल रहे हैं। दरअसल, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी मामला आने के बाद से कैलाश विजयवर्गीय की राजनीति हाशिए पर आ गई है। सरकार में मंत्री पद से जरुर उन्हें नहीं हटाया गया लेकिन विजयवर्गीय के कद को कम कर दिया गया है। अब जब दोनों सार्वजिनक कार्यक्रम में इस तरह मिले तो कयास लगाए गए कि मोदी की मन की बात के बीच कौन किसके मन की बात कर रहा है। क्या मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को समझाने का प्रयास कर रहे हैं या फिर वे अपनी दुविधाएं बता रहे हैं। आकलन है कि कैलाश विजयवर्गीय लगातार दिल्ली जा रहे हैं क्योंकि उनकी इच्छा अब केंद्रीय संगठन में जाने की है। यही कारण है कि कमरों में विवाद की खबरों के बीच खुले मंच पर इस तरह बतियाना सब कुछ ठीक है का इशारा है या वाकई मनमुटाव खत्म हुआ है।