MP के शासकीय प्रेस में रद्दी घोटाला, 23 टन रद्दी डकार गए अफसर

भोपाल के सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में 1.34 करोड़ रुपये का रद्दी घोटाला सामने आया है। ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से रातों-रात ट्रकों में 23 टन ज्यादा रद्दी पार कर दी गई।

Updated: Jul 23, 2026, 01:29 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग में रद्दी कागज की बिक्री से जुड़े टेंडर में बड़े स्तर पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। दस्तावेजों, तौल रिकॉर्ड और मौके पर जुटाए गए सबूतों के आधार पर हुई जांच में सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक तुलाई के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया है। जांच के अनुसार, केवल दो ट्रकों के रिकॉर्ड में करीब 23 टन रद्दी कम दिखाई गई। जिससे पूरे टेंडर में सरकार को लगभग 1.34 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

जांच के मुताबिक, विभाग ने 16 नवंबर 2025 को ई टेंडर क्रमांक 958 जारी कर सरकारी प्रेस से 60 मीट्रिक टन रद्दी कागज उठाने का ठेका निकाला था। टेंडर की शर्तों में जरूरत पड़ने पर रद्दी की मात्रा बढ़ाने का भी प्रावधान रखा गया था। यह ठेका भोपाल के बेलदारपुरा स्थित मैसर्स मां ट्रेडर्स को मिला। ठेकेदार को एक महीने के भीतर पूरी रद्दी उठाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए 25 मई 2026 को विभाग के कंट्रोलर ने प्रभारी लेखा अधिकारी भवेशकांत सिन्हा की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की।

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वित्त विभाग के साइबर ट्रेजरी पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार, ठेकेदार कंपनी ने 29 और 30 जून 2026 को विभागीय खाते में दो अलग-अलग चालानों के जरिए कुल 2 लाख रुपये जमा किए। इसके बाद 30 जून को सरकारी प्रेस में पूरे दिन रद्दी कागज ट्रकों में लोड किया गया। रात 11:29 बजे ट्रक RJ 11 GA 8824 और RJ 05 GA 8663 प्रेस परिसर से रवाना हुए।

जांच के दौरान दोनों ट्रकों का पीछा किया गया। रात करीब 11:45 बजे दोनों वाहन गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित संजय स्केल्स धर्मकांटे पहुंचे। वहां उनकी तुलाई हुई। पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि निगरानी समिति के सदस्य तुलाई स्थल पर मौजूद रहने के बजाय पास में खड़ी कार में बैठे रहे और धर्मकांटे का कर्मचारी तौल पर्चियां कार तक पहुंचाकर गया।

इसके बाद 2 जुलाई 2026 को उसी धर्मकांटे से ट्रकों के नंबर और तुलाई के समय के आधार पर डुप्लीकेट तौल पर्चियां प्राप्त की गई। इन रिकॉर्ड में दोनों ट्रकों का कुल नेट वजन 29,775 किलोग्राम (करीब 29.7 टन) दर्ज मिला। हालांकि, जब सरकारी फाइलों की जांच की गई तो उनमें गोविंदपुरा के धर्मकांटे की जगह मिसरौद स्थित भवानी धर्मकांटे की पर्चियां संलग्न थी। सरकारी रिकॉर्ड में दोनों ट्रकों का कुल वजन केवल 6,820 किलोग्राम दर्ज था।

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इस तरह दोनों रिकॉर्ड के बीच 22,955 किलोग्राम (करीब 23 टन) का अंतर सामने आया। जांच में यह भी पाया गया कि दोनों धर्मकांटों के बीच करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद तौल पर्चियों में दर्ज समय कुछ ही मिनटों का अंतर दिखाता है। इसके अलावा भवानी धर्मकांटे की पर्चियों के सीरियल नंबर अलग-अलग थे लेकिन वाहन नंबर का शुरुआती हिस्सा RJ11GA समान दर्ज था और केवल अंतिम अंक अलग थे। इन तथ्यों ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।

जांच में दो ट्रकों के आधार पर संभावित नुकसान का भी आकलन किया गया। ट्रक RJ 05 GA 8663 में वास्तविक और सरकारी रिकॉर्ड के बीच 11,680 किलोग्राम का अंतर मिला। जिससे 32.55 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से करीब 3.80 लाख रुपये के संभावित नुकसान का अनुमान लगाया गया। वहीं, ट्रक RJ 11 GA 8824 में 11,275 किलोग्राम का अंतर मिला। जिससे करीब 3.67 लाख रुपये के नुकसान की संभावना जताई गई। दोनों ट्रकों को मिलाकर संभावित नुकसान 7.47 लाख रुपये बैठता है।

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