उज्जैन: रावण दहन के विरोध में उतरा युवा ब्राह्मण समाज, चार दशहरा समितियों को भेजा लीगल नोटिस

महाकाल मंदिर के महेश पुजारी ने कहा कि नगर और देश में रावण दहन की आड़ में ब्राह्मणों का अपमान किया जा रहा है।

Updated: Oct 16, 2026, 07:05 PM IST

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में दशहरा पर्व से पहले रावण दहन को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। महाकाल मंदिर से जुड़े पुजारी महेश पुजारी ने रावण दहन की परंपरा पर सवाल उठाते हुए इसे बंद कराने का अभियान शुरू कर दिया है। उनका दावा है कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस सहित प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में रावण वध का वर्णन तो मिलता है, लेकिन रावण दहन का कहीं उल्लेख नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने चार आयोजक संस्थाओं को नोटिस भेजे हैं और शास्त्रार्थ के माध्यम से इस विषय पर निर्णय की मांग की है।

अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के बैनर तले रावण दहन करने वाली 4 आयोजक समितियों को वकील के माध्यम से यह नोटिस भेजा है। संस्था ने समितियों से 7 दिन में यह बताने को कहा है कि किस धर्मशास्त्र और पुराण में आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध का उल्लेख है। जवाब नहीं मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इतना ही नहीं शहर में जगह-जगह रावण दहन के विरोध में पोस्टर भी लगाए गए हैं।

अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने वकील अश्विन चौधरी के माध्यम से लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति, कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति, सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति को नोटिस भेजा है। नोटिस में आयोजकों को रावण से संबंधित धर्मशास्त्र की बातें बताते हुए कहा गया है कि ब्राह्मण समाज इससे असंतुष्ट है। समाज ने आयोजकों से आगामी आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण दहन नहीं करने को कहा है। यदि वे इस तिथि पर रावण दहन करते हैं, तो उन्हें बताना होगा कि किस शास्त्र और पुराण में इस तिथि को रावण वध होने का उल्लेख है।

नोटिस में कहा गया है कि 7 दिन के भीतर रावण दहन के संबंध में स्पष्ट उल्लेख नहीं दिया गया, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें होने वाले हर्जे और खर्चे भी आयोजक समितियों को वहन करने होंगे। महेश पुजारी ने कहा कि नगर और देश में रावण दहन की आड़ में ब्राह्मणों का अपमान किया जा रहा है। इसे बंद किया जाना चाहिए। रावण दहन करने वाली समितियां करोड़ों सनातनियों को बताएं कि किस शास्त्र में रावण दहन का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि रावण दहन की आड़ में ब्राह्मणों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि रावण ने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया कि हर साल उसे जलाया जाए।