भिंड लोक अदालत में खत्म हुआ बरसों पुराना विवाद, 76 साल की दंपती ने फिर से की नए जीवन की शुरुआत
भिंड में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में 76 वर्षीय बुजुर्ग दंपती ने आपसी विवाद भुलाकर दोबारा साथ रहने का फैसला किया। कोर्ट रूम में दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई।
भिंड। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को सालों से चले आ रहे पारिवारिक विवाद का ऐसा समाधान हुआ जिसने न्यायिक प्रक्रिया को भावनात्मक पहल से जोड़ दिया है। कुटुंब न्यायालय भिंड में 76 वर्षीय दंपती राधेश्याम गुप्ता और पूनादेवी गुप्ता ने काउंसलिंग के बाद अपने मतभेद खत्म कर दोबारा साथ रहने का फैसला किया। न्यायालय कक्ष में दोनों ने एक दूसरे को माला पहनाई और साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित लोक अदालत जिला एवं सत्र न्यायाधीश कालू सिंह बारिया के मार्गदर्शन में हुई। इस दौरान कुटुंब न्यायालय की खंडपीठ क्रमांक-1 में लंबित पारिवारिक मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने पर जोर दिया गया। कई दंपतियों ने पुराने मतभेद छोड़कर साथ रहने की सहमति जताई।
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सबसे प्रमुख मामला सेना से सेवानिवृत्त पेंशनर राधेश्याम गुप्ता और उनकी पत्नी पूनादेवी गुप्ता का रहा था। पत्नी ने पति से भरण पोषण की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की थी। दोनों के बीच काफी समय से विवाद चल रहा था। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दिलीप गुप्ता ने दोनों की काउंसलिंग की और बातचीत के जरिए विवाद समाप्त करने के लिए समझाइश दी। इसके बाद दंपती ने मुकदमे को आगे बढ़ाने के बजाय साथ रहने का निर्णय लिया।
राजीनामा होने के बाद न्यायालय में ही दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई। इस दौरान मौजूद लोगों के बीच यह दृश्य खासा भावुक रहा था। लंबे समय से चले आ रहे मतभेद खत्म होने के बाद दंपती के चेहरों पर संतोष और खुशी दिखाई दी। लोक अदालत में परिवारों को जोड़ने के संदेश को एक अलग तरीके से भी आगे बढ़ाया गया। समझौते के जरिए विवाद खत्म करने वाले दंपतियों को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कालू सिंह बारिया और प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय दिलीप गुप्ता ने एक-एक हरा पौधा दिया।
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न्यायाधीशों ने पौधे को रिश्तों की देखभाल का प्रतीक बताते हुए दंपतियों को समझाया कि जिस तरह पौधे के विकास के लिए नियमित देखभाल जरूरी होती है उसी तरह वैवाहिक संबंधों में भी प्रेम, भरोसा और संवाद बनाए रखना जरूरी है। छोटी-छोटी बातों को विवाद में बदलने के बजाय पति-पत्नी को आपस में बैठकर समाधान तलाशना चाहिए। दंपतियों से कहा गया कि वे लोक अदालत से मिले पौधे को घर में लगाएं और उसकी देखभाल करें। यदि भविष्य में उनके बीच कोई मतभेद हो तो पौधे की छांव में बैठकर बातचीत के जरिए समस्या सुलझाने का प्रयास करें।




