चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे बने मकानों बुलडोजर चलाने की तैयारी, नदी की सीमा का होगा पुनर्निरीक्षण
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की भीषण बाढ़ के बाद सतना प्रशासन एक्शन में है। कलेक्टर ने नदी किनारे हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण की जांच के लिए स्पेशल टीम बनाई है।
चित्रकूट। मध्य प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की भीषण बाढ़ के बाद अब नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा डालने वाले निर्माण प्रशासन के निशाने पर हैं। सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के निर्देश पर नदी क्षेत्र में हुए निर्माण और अतिक्रमण की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। टीम नदी की सीमा और तटीय इलाकों का निरीक्षण कर यह पता लगाएगी कि कहीं मकान, दुकान या अन्य निर्माण नदी के बहाव क्षेत्र में तो नहीं किए गए हैं।
जांच की जिम्मेदारी मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर को दी गई है। उनके नेतृत्व वाली टीम में नगर परिषद चित्रकूट के सीएमओ, नायब तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ, जल संसाधन विभाग के एसडीओ और नगर परिषद के सब इंजीनियर शामिल हैं। टीम मंदाकिनी नदी की सीमा का मौके पर निरीक्षण करने के साथ उपलब्ध अन्य संसाधनों की मदद से तटीय क्षेत्रों में बने निर्माणों की स्थिति भी जांचेगी।
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प्रशासन के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्धारित नियमों को ध्यान में रखकर की जाएगी। जांच में यदि कोई निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने वाले निर्माणों को हटाकर भविष्य में बाढ़ के दौरान हालात बिगड़ने से रोकना है।
मंदाकिनी में पिछले महीने 28 और 29 अगस्त की रात आई बाढ़ ने चित्रकूट में गंभीर स्थिति पैदा कर दी थी। इस दौरान नदी का जलस्तर 140 मीटर की सीमा को पार करते हुए 145.66 मीटर तक पहुंच गया था। बाढ़ के तेज बहाव की वजह से हनुमानधारा पुल भी बह गया था।
बाढ़ के बाद प्रशासन अब नदी के वास्तविक बाढ़ स्तर का नए सिरे से सीमांकन कराने की तैयारी में है। इसके आधार पर नदी के बहाव और प्रभावित क्षेत्र को चिन्हित किया जाएगा ताकि भविष्य में निर्माण की गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से निगरानी रखी जा सके।
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कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्पष्ट किया है कि मंदाकिनी के प्राकृतिक बहाव वाले हिस्से को बाधामुक्त रखा जाएगा। प्रशासन पहले यह जांच करेगा कि किन निर्माणों से नदी के रास्ते में रुकावट पैदा हो रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार, संबंधित निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। बाढ़ के दौरान सामने आई स्थिति के बाद माना जा रहा है कि नदी किनारे अतिक्रमण और निर्माण की व्यापक जांच प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है। चित्रकूट और सतना प्रशासन के अधिकारी मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।




