दिल्ली के भूजल में जहर: पानी पीने से कैंसर का खतरा, CAG रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
दिल्ली में पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर खतरा सामने आया है। CAG की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जांचे गए 16,234 भूजल नमूनों में से 8,933 यानी 55 फीसदी पीने के लायक नहीं पाए गए।
नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में गंदा पानी पीने से 24 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद अलग-अलग शहरों में पानी की क्वालिटी को लेकर सवाल उठने लगे। अब पता चला है कि खुद राजधानी दिल्ली का ही पानी पीने लायक नहीं है। यानी अभी जो पानी दिल्लीवासी अपने घर में पी रहे हैं, वह खराब और हानिकारक हो सकता है। उससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी हो सकता है।
केंद्र सरकार के अधीन कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। CAG की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में अंडरग्राउंड पानी के सैंपलों में आधे से अधिक क्वालिटी में फेल पाए गए। यानी वह पीने योग्य नहीं थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य भर में अंडरग्राउंड वाटर यानी जमीन के नीचे के पानी के 16,234 सैंपल लिए गए थे। इनमें आधे से अधिक, 55 फीसदी सैंपल फेल हो गए। यही नहीं, यह भी पाया गया कि राजधानी को वर्तमान में जितने पानी की जरूरत है, उससे 25 फीसदी कम ही पीने के लिए उपलब्ध है।
CAG ने अपने ऑडिट में पाया कि जो पानी की लोगों के घरों में हो रही है, उसकी भी टेस्टिंग ठीक ढंग से नहीं की जा रही है। वजह है कि दिल्ली जल बोर्ड के टेस्टिंग लैब में कर्मचारियों और उपकरणों की कमी है। साथ ही CAG ने पाया कि जो टेस्टिंग की भी जा रही है, वह भी BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) के तय मानक के हिसाब से नहीं हो रही है।
CAG ने यह भी पाया कि पांच साल में बोरवेल और कुओं से 80-90 मिलियन गैलन पानी प्रति दिन सप्लाई किया गया। इस पानी को बिना ट्रीट किए, कच्चा ही लोगों के घरों में सप्लाई किया गया। यह पानी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं खड़ा कर सकता है। CAG ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जिन इलाकों में अंडरग्राउंड पानी की सप्लाई की जा रही है और सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए हैं, वहां के लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड की लैब में पानी के सैंपलों को BIS के तहत तय 43 पैरामीटर में से केवल 12 पैरामीटर पर टेस्ट किए गए। ऐसे में जहरीले पदार्थों, रेडियोएक्टिव तत्वों, बायोलॉजिकल और वायरोलॉजिकल पैरामीटर और आर्सेनिक और लेड जैसी भारी धातुओं के लिए जरूरी टेस्ट ही नहीं किए गए। ऑडिट में यह भी बताया गया है कि प्राइवेट तौर पर चलाए जा रहे वॉटर ट्रीटमेंट और रीसाइक्लिंग प्लांट में बैन, कैंसर पैदा करने वाले पॉलीइलेक्ट्रोलाइट्स का इस्तेमाल जारी है। जबकि इनके इस्तेमाल पर रोक लगाने के साफ निर्देश दिए गए थे।
CAG का साफ मानना है कि पीने के पानी में रेडियोएक्टिव पदार्थों और भारी धातुओं की मौजूदगी जानलेवा हो सकती है। इससे जरूरी अंगों को नुकसान, एनीमिया और कैंसर हो सकता है। इन टेस्ट को न करने से दिल्ली के निवासियों को गंभीर बीमारियों और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा है। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने इस मामले में तुरंत जवाबदेही और सुधार की मांग की है। JSAI ने दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी से अपील करते हुए कहा है कि निवासियों को बिना ट्रीट किए गए अंडरग्राउंड पानी की सप्लाई तुरंत बंद करें।




