CGPSC भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा, 60 लाख में बिके पेपर, मैरिज पैलेस में रातभर रटवाए गए सवाल
CGPSC भर्ती घोटाले में सरकारी गवाह के खुलासों से बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। प्रिलिम्स और मेन्स परीक्षा में सवाल रटवाकर 29 अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराया गया है।
छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में सीबीआई जांच के दौरान सामने आए सरकारी गवाह चंद्राकर के बयानों ने प्रदेश की भर्ती व्यवस्था की जड़ें हिला दी हैं। गवाह के मुताबिक, तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, सचिव जीवन किशोर ध्रुव और उनसे जुड़े रसूखदारों ने पद और प्रभाव का खुला दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों को योजनाबद्ध तरीके से सरकारी नौकरी दिलवाई। यह पूरा खेल पैसे, सत्ता और प्रश्नपत्रों की खुलेआम खरीद-फरोख्त पर टिका था।
जांच में खुलासा हुआ है कि साल 2021–22 की CGPSC परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए 50 से 60 लाख रुपये तक की डील तय की गई थी। सरकारी गवाह के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर ने अपने मौसा और तत्कालीन ओएसडी केके चन्द्रवंशी तथा ओएसडी चेतन बोघरिया के प्रभाव का हवाला देते हुए यह रकम मांगी थी। सौदा पक्का होते ही परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 12 फरवरी 2022 को रायपुर के सिद्धिविनायक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को प्रिंटेड प्रश्नपत्र रटवाए गए थे।
इस मैरिज पैलेस में रितेश चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, समीर चंद्राकर, माधुरी साहू, प्रवीण कुमार प्रसाद, सत्येन्द्र सिंह ठाकुर, पुल्कीत साहू और भारती वर्मा को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए थे। इसके बाद इन सभी का चयन प्रिलिम्स परीक्षा में हो गया। जिसकी वजह से पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
प्रिलिम्स के बाद भ्रष्टाचार का यह सिलसिला मेन्स परीक्षा तक पहुंचा। मेन्स की तैयारी के लिए बारनवापारा के एक रिसॉर्ट को चुना गया। यहां कड़े पहरे के बीच फर्जी नामों से छात्रों को ठहराया गया था। इस दल में पहले से चयनित अभ्यर्थियों के साथ ऋचा कौर, ज्योति सूर्यवंशी, दिव्यानी तिवारी, योगेश देवांगन, कृति सिंह, मनीष, निकिता, प्रतीक, विनोद सिंह, निवेदिता राजपूत, शास्वत सोनी, कवीश सिन्हा, सुषमा अग्रवाल, अर्चना, पूजा, भवानी पैंकरा, शशांक मिश्रा, निधि, पेमेन्द्र चन्द्राकर, प्रकाश चन्द्राकर और एक अन्य साहू युवक भी शामिल थे।
रिसॉर्ट में केवल अभ्यर्थी ही नहीं बल्कि पेपर हल कराने के लिए शिक्षकों को भी बुलाया गया था। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, धर्मेन्द्र साहू और परितोष जैसे शिक्षकों की मदद से उत्तर तैयार करवाए गए। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि इस पूरे खेल का संचालन शीर्ष स्तर से हुआ था। इसमें तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपने बेटे नितेश सोनवानी, भतीजे साहिल सोनवानी, भांजी सुनीता जोशी और बहुओं निशा कोसले व दीपा आदिल का चयन सुनिश्चित कराया था।
इसी तरह तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव, राज्यपाल के सचिव के बच्चें नेहा और निखिल खलखो तथा कांग्रेस नेताओं के करीबी बताए जा रहे प्रज्ञा नायक, प्रखर नायक, अनन्या अग्रवाल, शशांक गोयल और भूमिका कटियार का चयन भी संदेह के घेरे में है। चार्जशीट में इन नामों का उल्लेख इस बात की ओर इशारा करता है कि यह कोई इक्का-दुक्का गड़बड़ी नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार था।
सीबीआई ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए टामन सोनवानी, श्रवण कुमार गोयल, शशांक गोयल, भूमिका कटियार, नितेश सोनवानी, साहिल सोनवानी, ललित गणवीर, जीवन किशोर ध्रुव, सुमित ध्रुव, आरती वाशनिक, निशा कोसले, दीपा आदिल और उत्कर्ष चंद्राकर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी परतें खुल सकती हैं।
यह पूरा मामला प्रदेश के लाखों मेहनती युवाओं के साथ एक क्रूर मजाक बनकर सामने आया है। आरोप है कि 29 अयोग्य अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी चयन प्रणाली को कुर्बान कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ये 29 अभ्यर्थी प्रिलिम्स परीक्षा में तो पास हो गए लेकिन मेन्स में इनके साथ खेल बिगड़ गया। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर ये 29 प्रिलिम्स में ही बाहर हो जाते तो कितने योग्य उम्मीदवार आज अधिकारी बन चुके होते।
यह भी जानकारी सामने आई है कि इन 29 अभ्यर्थियों की भूमिका की अलग से जांच कराने के लिए छात्र संघ EOW जैसी जांच एजेंसी को आवेदन देने की तैयारी में हैं। इस खुलासे ने उन हजारों युवाओं के जख्म फिर से हरे कर दिए हैं जिन्होंने सालों तक एक कमरे में बंद होकर मेहनत की। जबकि, कुछ लोग मैरिज पैलेस और रिसॉर्ट के रास्ते सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंच गए।




