नागरिकों की प्राइवेसी का सम्मान करो या भारत छोड़ो, सुप्रीम कोर्ट की मेटा-व्हाट्सएप को कड़ी फटकार
सीजेआई सूर्यकांत ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बहुत चालाकी से इस तरह तैयार की गई है कि आम यूज़र भ्रमित हो जाए।
नई दिल्ली। वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर प्राइवेसी को लेकर आरोपों के घेरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेटा और वॉट्सऐप को उनकी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कड़ी फटकार लगाई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हम आपको यूजर्स की एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। आप इस देश के नागरिकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते।
CJI ने दो टूक कहा कि यदि आप हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दें। हम नागरिकों की प्राइवेसी से समझौता नहीं होने देंगे।दरअसल, ये पूरा मामला वॉट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसमें कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने नवंबर 2024 में मेटा पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की बेंच ने IT मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने को कहा है। कोर्ट इस मामले में 9 फरवरी को अंतरिम आदेश देगा।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आप डेटा साझा करने के नाम पर इस देश के निजता के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। हम आपको डेटा का एक भी शब्द साझा करने की अनुमति नहीं देंगे। या तो आप एक लिखित आश्वासन दें। आप नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते।
अदालत ने कहा कि देश में निजता के अधिकार की सख्ती से रक्षा की जाती है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि गोपनीयता की शर्तें इतनी चतुराई से तैयार की जाती हैं कि एक आम व्यक्ति उन्हें समझ ही नहीं पाता। यह निजी जानकारी की चोरी करने का एक शालीन तरीका है। हम आपको ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे। आपको एक आश्वासन देना होगा, अन्यथा हमें आदेश पारित करना पड़ेगा।
CJI ने कहा कि सड़क पर ठेला लगाने वाली महिला इन नियमों को कैसे समझेगी? क्या आपने सोचा है कि आप कितनी मुश्किल भाषा लिखते हैं? हर शर्त की जांच होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कॉमर्शियल पर्पस के लिए यूजर के डेटा शेयर करने की शोषणकारी नीति की आलोचना की।
वहीं मेटा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की तरफ से लगाया गया जुर्माना जमा कर दिया गया है, हालांकि मामला अपील के अधीन है। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं के पास ऑप्ट-आउट का विकल्प मौजूद है और 15 नवंबर के आदेश से जुड़े निर्देशों का पालन किया जा रहा है। इस पर CJI ने सख्त लहजे में कहा कि ऑप्ट-आउट जैसे विकल्प नागरिकों के मौलिक अधिकारों का विकल्प नहीं हो सकते। अदालत ने साफ कर दिया कि किसी भी हाल में डेटा शेयरिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।




