MP: एनीमिया मुक्त भारत अभियान में बड़ा खेल, गुजरात में 2 तो MP में 10.52 रुपये का रेट, टेंडर निरस्त

मध्य प्रदेश में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हीमोग्लोबिन मीटर और क्युवेट की खरीद में राज्यों के बीच भारी कीमत अंतर सामने आया। MP में जांच की प्रस्तावित दर 10.52 रुपए प्रति टेस्ट थी, जबकि गुजरात में करीब 2 रुपए।

Updated: Aug 23, 2026, 04:09 PM IST

भोपाल। सरकारी अस्पतालों में एनीमिया की जांच के लिए हीमोग्लोबिन मीटर और क्युवेट खरीदने की प्रक्रिया में मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों के बीच कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है। एक ही निर्माता कंपनी के सिस्टम से गुजरात के वडोदरा में करीब 2 रुपए में होने वाली जांच की लागत मध्य प्रदेश में 10.52 रुपए प्रति टेस्ट प्रस्तावित थी। मामला उठने के बाद मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन ने करीब 90.01 करोड़ रुपए का टेंडर रद्द कर दिया।

मामला केंद्र सरकार के एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत सरकारी अस्पतालों के लिए उपकरण और जांच सामग्री की खरीदी से जुड़ा है। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में एक ही निर्माता कंपनी आदित्य क्लीनिकल सिस्टम्स के सिस्टम से होने वाली जांच की लागत में कई गुना अंतर है।

गुजरात के वडोदरा में एक टेस्ट की लागत करीब 2 रुपए बताई गई है। मध्य प्रदेश में यही दर 10.52 रुपए प्रति टेस्ट प्रस्तावित थी। बिहार में यह खर्च करीब 13 रुपए और राजस्थान में 20 रुपए प्रति टेस्ट तक पहुंच रहा है। इस तरह राज्यों के बीच जांच की लागत में करीब 10 गुना तक का अंतर दिखाई दिया है।

मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन ने 27,052 हीमोग्लोबिन मीटर खरीदने के लिए करीब 5.67 करोड़ रुपए और क्युवेट की खरीदी के लिए करीब 88.80 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च तय किया था। दोनों को मिलाकर टेंडर की कुल अनुमानित राशि 90.01 करोड़ रुपए थी।

टेंडर प्रक्रिया में आदित्य क्लीनिकल सिस्टम्स के डीलर कंठाली ट्रेडर्स की बोली सबसे कम यानी एल-1 रही। डीलर ने एक हीमोग्लोबिन मीटर के लिए 1,997 रुपए और क्युवेट के लिए 9.89 रुपए की दर प्रस्तावित की थी। मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन के एमडी मयंक अग्रवाल ने बताया कि डीलर की ओर से दिए गए रेट स्वीकृत नहीं होने के कारण टेंडर को रद्द कर दिया गया है।

दूसरी ओर आदित्य क्लीनिकल सिस्टम्स के सीईओ आदित्य ठक्कर ने कहा कि उनकी कंपनी पूरे देश में हीमोग्लोबिन मीटर की सप्लाई करती है। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कीमतों पर मीटर उपलब्ध कराने के कारण के बारे में उन्होंने फिलहाल कोई जानकारी देने से इनकार किया। उनका कहना है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और इस संबंध में जवाब अदालत में ही दिया जाएगा।

टेंडर रद्द होने के साथ अब मध्य प्रदेश में इन उपकरणों और क्युवेट की खरीदी के लिए आगे की प्रक्रिया पर नए सिरे से फैसला होना है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र के एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ी संख्या में लोगों की हीमोग्लोबिन जांच के लिए इन उपकरणों का इस्तेमाल किया जाना है।