जेल में दूषित पानी से बिगड़ी सोनम वांगचुक की तबीयत, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर AIIMS लेकर पहुंची पुलिस

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार जोधपुर एम्स लाया गया। जेल में दूषित पानी से पेट में गंभीर संक्रमण के बाद विशेषज्ञों ने उनकी जांच की।

Updated: Jan 31, 2026, 01:37 PM IST

जोधपुर। लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार सुबह उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जोधपुर सेंट्रल जेल से एम्स अस्पताल लाया गया। अस्पताल में वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम ने उनका मेडिकल परीक्षण किया। जेल में उपलब्ध कथित दूषित पानी के चलते उनके पेट में गंभीर संक्रमण और तेज दर्द की शिकायत के बाद यह जांच कराई गई।

मामले की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि यह मेडिकल चेकअप सुप्रीम कोर्ट के सीधे निर्देश पर कराया गया है। शीर्ष अदालत ने वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए स्पष्ट आदेश दिए थे कि उनकी जांच सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर विशेष रूप से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से कराई जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एम्स जोधपुर में हुई ताजा मेडिकल जांच की रिपोर्ट 2 फरवरी तक सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाए जिसके आधार पर आगे की कानूनी और चिकित्सकीय कार्रवाई की जाएगी।

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शनिवार सुबह वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच एम्स अस्पताल ले जाया गया। पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश के निर्देश पर जेल से अस्पताल तक पूरे रास्ते और अस्पताल परिसर में हाई सुरक्षा व्यवस्था लागू रही थी। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान एसीपी छवी शर्मा, बासनी थाना प्रभारी नितिन दवे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस का भारी जाब्ता मौजूद रहा था।

एम्स जोधपुर में वांगचुक की जांच वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने की। जानकारी के मुताबिक, उनकी पेट संबंधी समस्याओं को देखते हुए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने विशेष रूप से परीक्षण किया। डॉक्टरों ने जरूरी मेडिकल टेस्ट कर उनकी मौजूदा हालत का बारीकी से आकलन किया और पिछली सभी मेडिकल रिपोर्ट्स से तुलना भी की। बताया जा रहा है कि अब तक सोनम वांगचुक की कुल 21 बार मेडिकल जांच हो चुकी है। इसके बावजूद जेल में पानी की गुणवत्ता और इलाज की व्यवस्था को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।

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गौरतलब है कि सोनम वांगचुक सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था और बाद में लद्दाख से शिफ्ट कर जोधपुर जेल भेज दिया गया। उनकी पत्नी ने इस हिरासत और स्वास्थ्य संबंधी हालात को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। समर्थकों का आरोप है कि जेल प्रशासन बुनियादी सुविधाओं खासकर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में विफल रहा है। जिसके चलते सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती चली गई।

अब सबकी नजरें 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाने वाली मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हैं। इस रिपोर्ट से न सिर्फ सोनम वांगचुक की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति सामने आएगी बल्कि यह भी तय होगा कि जेल प्रशासन की जिम्मेदारी और लापरवाही पर आगे क्या कार्रवाई होती है। विपक्षी हलकों में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि जब एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले जलवायु कार्यकर्ता की सेहत की यह हालत है तो जेलों में बंद आम कैदियों की स्थिति कैसी होगी।

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