UGC के नए नियमों के खिलाफ देशभर में उबाल, दिल्ली में बढ़ाई गई BJP हेडक्वार्टर की सुरक्षा

जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण संगठनों का आरोप है कि नए नियम उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और कैंपस में असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

Updated: Jan 27, 2026, 04:18 PM IST

नई दिल्ली। उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय और बीजेपी हैडक्वार्टर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जबकि बिहार उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों के लोग सड़क पर उतर आए हैं।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने जगह-जगह प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजी हैं।

यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। UGC के नए नियमों को लेकर कुमार विश्वास ने तंज कसा। सोशल मीडिया पर लिखा, 'चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं... मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।'

दरअसल, UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है, 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।' इसके तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं।

ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।