भोपाल नगर निगम परिषद में हंगामा, गोकशी और दूषित जल के मुद्दे पर महापौर से इस्तीफे की मांग
भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में गोकशी और दूषित पानी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के पार्षद आमने-सामने आए। भाजपा पार्षद ने अवैध स्लॉटर हाउस बंद करने की मांग उठाई। कांग्रेस ने महापौर से इस्तीफा मांगा।
भोपाल। नगर निगम परिषद की मंगलवार को आईएसबीटी सभागार में हुई बैठक विकास एजेंडे से भटककर तीखे हंगामे और राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गई। शहर में बढ़ते गोकशी के मामलों और दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ पार्षदों ने निगम प्रशासन और महापौर मालती राय को कटघरे में खड़ा कर दिया।
बैठक शुरू होने से पहले ही माहौल तनावपूर्ण हो गया था। वार्ड 12 से भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने अपनी ही परिषद के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए शहर में संचालित अवैध स्लॉटर हाउसों को तत्काल बंद करने की मांग की। विरोध दर्ज कराने के लिए वे अपनी जैकेट पर स्लॉटर हाउस बंद करो का पंपलेट चिपकाकर सदन में पहुंचे थे। इससे सत्ता पक्ष के भीतर भी गोकशी को लेकर असंतोष साफ नजर आया।
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बैठक की औपचारिक शुरुआत होते ही कांग्रेस पार्षदों ने मोर्चा संभाल लिया। विपक्ष ने गोकशी की घटनाओं को नगर निगम की गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए महापौर से इस्तीफे की मांग कर दी। विपक्षी सदस्यों का आरोप था कि शहर बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है और दूषित पानी की आपूर्ति से आमजन परेशान हैं। जबकि, प्रशासन इन ज्वलंत मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।
हंगामे के बीच स्थिति तब और बिगड़ गई जब बैठक शुरू होने के एक घंटे बाद तक महापौर और परिषद अध्यक्ष की कुर्सियां खाली रहीं थी। दोनों शीर्ष पदाधिकारियों की अनुपस्थिति पर पार्षदों ने तीखी नाराजगी जताई जिससे सदन में शोर-शराबा और बढ़ गया।
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इस उथल-पुथल का असर शहर के विकास कार्यों पर भी पड़ा है। भारी हंगामे के चलते नगर के विकास से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। कुल मिलाकर निगम परिषद की यह बैठक विकास के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवालों के साथ समाप्त हुई।




