Faceless Assessment: टैक्स अधिकारियों ने जताई नाखुशी

Income Tax Reforms: टैक्स सिस्टम से भ्रष्टाचार मिटाने के प्रधानमंत्री के दावों पर आईटी अधिकारियों-कर्मचारियों ने कहा बिना मशविरा किए लिया फैसला

Updated: Aug 18, 2020 06:14 AM IST

Faceless Assessment: टैक्स अधिकारियों ने जताई नाखुशी
photo courtesy: business Standard

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आयकर रिटर्न की फेसलेस आकलन योजना पर कर अधिकारियों और कर्मचारियों के संगठन ने नाखुशी जताई है। इस संबध में संगठन ने सीबीडीटी के चेयरमैन पीसी मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि तकरीबन 97 प्रतिशत कर अधिकारी और कर्मचारी नाखुश हैं।

संगठन ने कहा है कि इस योजना की घोषणा से पहले अधिकारियों और कर्मचारियों को कॉन्फिडेंस में नहीं लिया गया। हालांकि, संगठन ने प्रधानमंत्री के कर व्यवस्था से भ्रष्टाचार समाप्त करने के विजन का समर्थन किया है।संगठन ने अपने पत्र में लिखा, “अगर विभाग ने हमें कॉन्फिडेंस में लिया होता तो शायद 97 प्रतिशत कर अधिकारी और कर्मचारी खुद को कटा हुआ महसूस नहीं करते।”

क्या है इनकम टैक्स फेसलेस आकलन

इस योजना के तहत करदाताओं और कर अधिकारियों को एक दूसरे से मिलने और पहचान रखने की जरूरत नहीं होगी। बताया जा रहा है कि इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और अधिकारियों के कर मामलों में जरूरत से अधिक दखल पर अंकुश लगेगा।

प्रधानमंत्री ने इस योजना को प्रत्यक्ष कर सुधार के रास्ते में बड़ा कदम बताते हुए कहा था, “अब तक जिस शहर में हम रहते हैं, उसी शहर के कर अधिकारी करदाताओं की जांच, अपील और नोटिस देने का जिम्मा संभालते थे। लेकिन अब ये भूमिका एक प्रकार से खत्म हो गई है, अब इसको प्रौद्योगिकी की मदद से बदल दिया गया है।’’

प्रधानमंत्री ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा था, ‘‘अब जांच के मामलों को देश के किसी भी क्षेत्र में किसी भी अधिकारी के पास औचक रूप से आबंटित किया जाएगा। जैसे अब मुंबई के किसी करदाता के रिटर्न से जुड़ा कोई मामला सामने आता है, तो इसकी छानबीन का जिम्मा अब मुंबई के अधिकारी के पास नहीं जाएगा, बल्कि संभव है वो चेन्नई की फेसलेस टीम के पास जा सकता है।’’

यह पूरी व्यवस्था कंप्यूटरीकृत होगी। इसमें अगर किसी को नोटिस भेजा जाता है, तो वह पूरी तरह से केंद्रीयकृत कंप्यूटर प्रणाली द्वारा ही भेजा जाएगा। उसके लिये किसी कर कार्यालय या किसी अधिकारी से मिलने की जरूरत नहीं होगी।”

प्रधानमंत्री ने कहा थाकि इस व्यवस्था से करदाता और आयकर दफ्तर को जान-पहचान बनाने का, प्रभाव और दबाव का मौका ही नहीं मिलेगा। सब अपने-अपने दायित्वों के हिसाब से काम करेंगे।

बिना तैयारी लागू हो पाएगी योजना?

एक तरफ प्रधानमंत्री इस योजना को प्रत्यक्ष कर सुधार की राह में बड़ा कदम बता रहे हैं। दूसरी तरफ यह तथ्य भी सामने आ रहा है कि इस फेसलेस आकलन योजना को लागू करने के लिए सरकार के पास पूरी तैयारी नहीं है।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक फेसलेस आकलन के पिछले साल के पहले बैच के ही मामले ही अभी पूरे नहीं हुए हैं साथ ही इसे अधार देने वाला ऑनलाइन सिस्टम भी अधूरा है। इसका बैक एंड फंक्शन काम नहीं कर रहा है। ऐसे में एक अधिकारी का कहना है कि इस योजना को विस्तार देना अपरिपक्व होगा।

हालांकि, दूसरी ओर एक कर अधिकारी ने अखबार फाइनेंसियल एक्सप्रेस को बताया कि बैक एंड फंक्शन पूरी तरह से काम कर रहा है और जीएसटी से पहले भी कुछ परेशानियां सामने आई थीं, जिन्हें समय के साथ दूर कर लिया गया था। इस नई योजना में भी ऐसा किया जाएगा।