मुआवजा मिलने तक नहीं रुकेगी जंग, ईरान ने सीजफायर से किया साफ इनकार
अमेरिका-ईरान युद्ध के 25वें दिन तेहरान ने भयंकर चेतावनी दी है। ईरानी कमांडर ने बिना मुआवजे और प्रतिबंध हटे पीछे हटने से इनकार कर दिया है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव अब 25वें दिन में पहुंच चुका है। इस युद्ध को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समझौते वाले बयान को लेकर ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कर दिया है कि जब तक तेहरान को युद्ध का मुआवजा, सभी आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और अमेरिका की गैर हस्तक्षेप की अंतरराष्ट्रीय गारंटी नहीं मिलती तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
सोमवार को टेलीविजन पर दिए गए संबोधन में रेजाई ने कहा कि ईरान अब बिना शर्त पीछे हटने वाला नहीं है और वह अपने नुकसान की पूरी भरपाई चाहता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के खिलाफ लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए और भविष्य में अमेरिका की दखलअंदाजी न हो इसकी कानूनी गारंटी भी जरूरी है।
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रेजाई के बयान से तेहरान के सख्त रुख का संकेत मिलता है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह संघर्ष पारंपरिक जवाबी कार्रवाई जैसा नहीं होगा। उन्होंने कहा, “अब आंख के बदले आंख नहीं बल्कि सिर के बदले सिर होगा और विरोधियों को खाड़ी क्षेत्र छोड़ना पड़ेगा।“ उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी सशस्त्र बल लगातार पूरी ताकत के साथ सैन्य अभियान चला रहे हैं और दबाव बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दिलचस्प बात यह है कि रेजाई ने दावा किया है कि यह युद्ध वास्तव में एक हफ्ते से ज्यादा पहले ही निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका था और उस समय अमेरिका युद्धविराम के लिए तैयार था। उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संघर्ष जारी रखने पर जोर दिया। रेजाई के मुताबिक, शुरुआती चरण के बाद अमेरिका को यह समझ आ गया था कि इस युद्ध में जीत का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं है।
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वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के संपर्क में है और तेहरान समझौते के लिए इच्छुक है। ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर ने रविवार को एक ईरानी नेता से बातचीत की थी। हालांकि, उन्होंने उस नेता का नाम उजागर नहीं किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बातचीत में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई शामिल नहीं थे।
साथ ही इस युद्ध के 25वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई का आदेश उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सलाह पर दिया था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस फैसले को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रम्प प्रशासन के सभी नेता इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं थे। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस सैन्य कार्रवाई को लेकर सहज नहीं थे।
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