भोपाल में 112 लो फ्लोर बसें डिपो से गायब, लोन नहीं चुकाने पर बैंक ने सीज की 100 बसें

भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बीसीएलएल के बेड़े की 368 में से 112 लो-फ्लोर बसें गायब हैं। जिनमें 12 बसें कर्नाटक बेची गईं और 100 बसें बैंक ने कब्जे में ले ली।

Updated: Oct 16, 2026, 07:27 PM IST

राजधानी भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राजधानी में करीब दो साल पहले तक चलने वाली 368 लो फ्लोर बसों में से 112 बसें अब भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) के डिपो में उपलब्ध नहीं हैं। इनमें 12 बसों को बेचकर कर्नाटक के उडुपी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। जबकि, 100 अन्य बसें लोन की किस्तें जमा नहीं होने के कारण बैंक के कब्जे में चली गई हैं। इस मामले को विधायक सुरेंद्र सिंह हनी बघेल ने विधानसभा में उठाते हुए बसों की बिक्री, उनके दूसरे राज्य भेजे जाने और ऑपरेटरों को किए गए भुगतान पर सवाल पूछे हैं।

राजधानी में पहले चार ऑपरेटरों के माध्यम से 368 लो फ्लोर बसों का संचालन किया जाता था। बीसीएलएल की देखरेख में चलने वाली इन बसों की संख्या धीरे-धीरे कम होती गई। बीसीएलएल और बस ऑपरेटरों के बीच खींचतान को भी इस स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल शहर में करीब 60 से 70 लो फ्लोर बसें ही संचालित हो रही हैं। इस बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में पीएम ई बसों का संचालन भी शुरू हो चुका है।

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जानकारी के मुताबिक, बेड़े में कुल 368 बसें थी। इनमें से 112 बसों के गायब होने की बात सामने आई है। वहीं, बीसीएलएल की रिपोर्ट और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  बची हुई 186 से अधिक बसें खराब मेंटेनेंस के कारण डिपो में खड़े-खड़े पूरी तरह कबाड़ हो चुकी हैं। इनमें से 142 बसों को आधिकारिक तौर पर कंडम घोषित किया जा चुका है। फिलहाल बेड़े में से केवल 70 बसें ही सड़कों पर चल रही हैं।

एनआईटी 41 के तहत बीसीएलएल से अनुबंधित 12 बसों को एपी मोटर्स द्वारा बेचे जाने और कर्नाटक के उडुपी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम को लेकर विधायक सुरेंद्र सिंह हनी बघेल ने विधानसभा में सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि इन बसों को बेचने और भोपाल से दूसरे राज्य भेजने की अनुमति किस अधिकारी ने दी थी। 

साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बसों के डिपो से हटने के बाद संबंधित ऑपरेटर को वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के तहत भुगतान किया गया था या नहीं। मामले पर परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। हालांकि, बसों की बिक्री की अनुमति, जिम्मेदार अधिकारियों और वीजीएफ भुगतान को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई।

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लो फ्लोर बसों से जुड़ा दूसरा मामला एनआईटी 121 और एनआईटी 122 के तहत अनुबंधित 100 बसों का है। जानकारी के मुताबिक, ऑपरेटर द्वारा लोन की किस्तें जमा नहीं किए जाने के कारण बैंक ने इन बसों को अपने कब्जे में ले लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि ये बसें भी बीसीएलएल के डिपो में उपलब्ध नहीं रहीं। ऐसे में अनुबंध के तहत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए लाई गई बसों के संचालन और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विधायक सुरेंद्र सिंह हनी बघेल ने विधानसभा में इन बसों की स्थिति पर भी सवाल किया था। सरकार की ओर से इस मामले में जानकारी जुटाने की बात कही गई लेकिन बसों की मौजूदा स्थिति और पूरे मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी स्पष्ट नहीं की गई।

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भोपाल में लो फ्लोर बसों की संख्या में आई गिरावट से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। कभी 368 बसों के जरिए शहर में यात्रियों को परिवहन सुविधा देने वाली व्यवस्था अब काफी सीमित रह गई है। वर्तमान में 60 से 70 बसों के संचालन के बीच पीएम ई बसों की शुरुआत हुई है लेकिन पुरानी बसों के डिपो से बाहर होने से जुड़े सवाल अब भी बने हुए हैं।