दिग्विजय सिंह के साथ पुलिसिया बलप्रयोग पर भड़के कमलनाथ, बोले- मत भूलो कल के बाद परसों भी आता है

राजधानी भोपाल में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर पुलिस ने चलाया वॉटर कैनन, कांग्रेस नेताओं में आक्रोश, बोले- तानाशाही चरम पर है, अंग्रेजों का अंजाम पता है न

Updated: Jul 11, 2021, 04:07 PM IST

दिग्विजय सिंह के साथ पुलिसिया बलप्रयोग पर भड़के कमलनाथ, बोले- मत भूलो कल के बाद परसों भी आता है

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री व दिग्गज कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के साथ पुलिसिया बलप्रयोग को लेकर कांग्रेस नेताओं में आक्रोश है। राज्यसभा सांसद के साथ हुई इस अमानवीयता को लेकर पीसीसी चीफ कमलनाथ से लेकर प्रदेशभर के दिग्गजों का गुस्सा देखने को मिला है। कमलनाथ ने इस मामले पर सीधा सीएम शिवराज सिंह चौहान को चुनौती देते हुए कहा है कि ये मत भूलो की कल के बाद परसो भी आता है।

पूर्व सीएम कमलनाथ ने ट्वीट किया, 'शिवराज सरकार गोविंदपुरा में पार्क की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्था को 1 रुपए मे दे रही है। इस कृत्य का प्रजातांत्रिक तरीक़े से विरोध करने पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी और दूसरे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। शिवराज जी, ये मत भूलिए कि कल के बाद परसों भी आता है।' 

दिग्विजय सिंह का प्रदर्शन खत्म होने के थोड़ी देर बाद ही एक वीडियो सामने आया है जिसने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उबाल ला दिया। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि भोपाल डीआईजी इरशाद वाली ने  बैरिकेडिंग पकड़े दिग्विजय का हाथ झिटककर हटा दिया। इसके बाद वह वॉटर कैनन संचालक को इशारा करते हैं और पानी की बौछार सीधा दिग्विजय सिंह के ऊपर छोड़ दी जाती है। 

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मध्यप्रदेश कांग्रेस ने पुलिस के इस कृत्य को घोर निंदनीय और आपत्तिजनक करार देते हुए कहा है कि शिवराज का तानाशाही बर्ताव चरम पर है। कांग्रेस ने इस वीडियो को साझा करते हुए ट्वीट किया, 'शवराज का अंग्रेज़ी राज : मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह जी के साथ शिवराज सरकार का यह बर्ताव तानाशाही का चरम है। शिवराज जी, यह घोर निंदनीय और आपत्तिजनक है। मध्यप्रदेश की जनता आपका अहंकार देख रही है। “तानाशाह का बेशर्मराज” 

मध्यप्रदेश यूथ कमीशन के चेयरमैन अभय तिवारी ने इस घटना को लेकर गुस्सा जाहिर करते हुए सीएम शिवराज से पूछा है कि आपको अंग्रेजों का अंजाम पता है न? तिवारी ने ट्वीट किया, 'पार्क की ज़मीन आरएसएस को देने का विरोध करने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जी एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं पर शिवराज ने वॉटर कैनन का उपयोग कर अंग्रेज़ी हुकूमत की याद दिला दी। शिवराज जी, अंग्रेजों का अंजाम पता है न?' 

इस घटना के बाद दिग्विजय सिंह की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने हमसमवेत की खबर को साझा करते हुए लिखा है कि, 'हम हर हालत में पार्क का मूल भूत स्वरूप नहीं बदलने देंगे। भाजपासंघ की दादागिरी से हम नहीं डरते।' सिंह ने इस मामले पर सिलसिलेवार तरीके से कई ट्वीट कर राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने लिखा, 'गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र का पार्क जिसमें मैंने, बाबूलाल जी गौर ने स्वयं शिवराज मामू ने पौधे लगाए उसे मामू ने लघु एवं मध्यम उद्योग भारती को औद्योगिक क्षेत्र असोसिएशन के विरोध के बाद भी करोड़ों की भूमि ₹१ में दे दी। यह एक मात्र पार्क है जिसमें मज़दूर दोपहर में भोजन करते हैं।' 

कांग्रेस नेता ने आगे लिखा कि, 'पार्क में लगे पेड़ काट दिए गए जला दिए गए। मैं स्वयं देख कर आया। मैंने शिवराज मामू से औद्योगिक असोसिएशन के डेलिगेशन के साथ मिलने का समय माँगा नहीं दिया। फ़ोन पर बात करने की कोशिश की। फ़ोन नहीं लिया। ना जाने क्या कारण है मामू ना मिलता है ना फ़ोन लेता है ना पत्रों का जवाब देता है। मैंने उद्योग विभाग के मंत्री को फ़ोन लगाया नहीं लगा। उनके वरिष्ट अधिकारी श्री पोरवाल जी से बात की। उन्होंने कहा हमारी चर्चा चल रही है हम उद्योग भारती को अन्य भूमि देने पर विचार कर रहे हैं। मैंने कहा उसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है आप उन्हें नए आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में दे दें।' 

राज्यसभा सांसद ने कहा है कि वे इस आबंटन को रद्द कराकर ही रहेंगे। उन्होंने लिखा, 'नियमों का व क़ानून का उल्लंघन करते हुए विश्वास सारंग जो कि मामू से भी अपने आप को बड़ा मानने लगे हैं बिना Land Use परिवर्तन व बिना Building Permission के शिलान्यास कर दिया। चुनाव क्षेत्र कृष्णा गौर का है। उसको भी विश्वास में नहीं लिया गया। केवल विशेष अतिथि का कार्ड भेज दिया। यह BHEL के Ancillaries निर्माण का औद्योगिक क्षेत्र है जिसे डॉ शंकर दयाल जी शर्मा के आग्रह पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू जी ने स्वीकृत किया था। भाजपासंघ की ज़मीनों की भूख अपार है। लेकिन कॉंग्रेस पार्टी मज़दूर, छोटे एवं मध्यम उद्योग पतियों के साथ हैं और इस आबंटन को अदालत से निरस्त करा कर रहेंगे।'