मध्य प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग, जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा पत्र

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मंत्री विजय शाह को अभियोजन से राहत देने के बाद मध्य प्रदेश में सियासी भूचाल आ गया है। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मोहन सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

Updated: Aug 26, 2026, 07:35 PM IST

मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान का मामला अब राजनीतिक टकराव के साथ संवैधानिक बहस का मुद्दा बन गया है। राज्य सरकार द्वारा शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देने के फैसले के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत पूरे मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की मांग की है। यह मामला 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई के लिए लगा है। इससे पहले शीर्ष अदालत राज्य सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी पर फैसला लेने में देरी को लेकर कड़ी नाराजगी जता चुकी है।

पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में पूरे घटनाक्रम को मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का बेहद शर्मनाक अध्याय बताया है। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी SIT ने मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगी लेकिन राज्य सरकार ने इसे मंजूरी नहीं देने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार एक मंत्री को राजनीतिक संरक्षण देकर न्यायिक प्रक्रिया के सामने बाधा खड़ी कर रही है।

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पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में स्पष्ट रुख रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल तक सीमित विषय नहीं है बल्कि यह देश के सामूहिक सम्मान से जुड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार राज्य के इस फैसले से सहमत नहीं है तो प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जाहिर करनी चाहिए।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में मध्य प्रदेश सरकार को SIT की रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन की मंजूरी पर फैसला लेने का निर्देश दिया था। मई में सुनवाई के दौरान भी अदालत ने देरी पर सख्त नाराजगी जताई और चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस दौरान सरकार से साफ तौर पर अपने पहले के आदेश का पालन करने को कहा था।

सुनवाई के दौरान विजय शाह की ओर से उनकी माफी का भी जिक्र किया गया था। हालांकि, अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अगर बयान महज जुबान फिसलने का नतीजा था तो माफी तुरंत मांगी जानी चाहिए थी। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से फैसले में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए थे।

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विवाद की शुरुआत मई 2025 में हुई थी। महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। कर्नल कुरैशी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ओर से मीडिया को सैन्य कार्रवाई की जानकारी देने वाली प्रमुख अधिकारियों में शामिल थ। शाह की टिप्पणी के बाद देशभर में विरोध हुआ और मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT का गठन किया गया। जांच पूरी होने के बाद SIT ने मंत्री के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी। इसी मंजूरी को लेकर राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच लंबे समय से स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया चल रही है।

अगस्त 2026 में सरकार के रुख को लेकर पहले से ही अटकलें चल रही थी। 25 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में अभियोजन की मंजूरी से जुड़ा प्रस्ताव सार्वजनिक एजेंडे में नहीं आया लेकिन इसके बाद सामने आई रिपोर्ट में सरकार की ओर से शाह को अभियोजन से राहत देने की सिफारिश की जानकारी सामने आई। 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले राज्य सरकार को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना है।

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जीतू पटवारी ने इसी फैसले को आधार बनाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूरे मंत्रिमंडल की संवैधानिक एवं नैतिक जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि सेना के सम्मान, न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और संविधान की मर्यादा की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाया जाना चाहिए। वहीं, सरकार के पक्ष में सामने आए तर्कों में यह कहा गया है कि विजय शाह विवादित बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। अब इस पूरे मामले में राज्य सरकार के फैसले और उसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट का रुख 31 अगस्त की सुनवाई में महत्वपूर्ण रहेगा।