रेत उत्खनन को लेकर सवाल करने पर 6 पत्रकारों के खिलाफ FIR, माफियाओं के आगे बेबस MP के पत्रकार

मध्यप्रदेश के खरगोन में सिस्टम की पोल खोलना पत्रकारों को पड़ा महंगा, डिस्ट्रिक्ट माइनिंग ऑफिसर के पास बाइट लेने गए और मुकदमा लेकर लौटे

Updated: Jul 05, 2021, 07:58 PM IST

रेत उत्खनन को लेकर सवाल करने पर 6 पत्रकारों के खिलाफ FIR, माफियाओं के आगे बेबस MP के पत्रकार

खरगोन। मध्यप्रदेश में सिस्टम की पोल खोलना अब पत्रकारों के लिए भारी पड़ने लगा है। पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर करने का ट्रेंड जो कोरोना काल में शुरू हुआ वह अब भी जारी है। हालिया मामला खरगोन का है जहां रेत उत्खनन को लेकर सवाल पूछने मात्र से आधा दर्जन पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। विभिन्न मीडिया संस्थानों के ये पत्रकार गए तो थे जिला खनिज अधिकारी का बाइट लेने लेकिन वापस मुकदमा लेकर लौटे।

मामले पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने का प्रयास कर रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता अरुण यादव ने ट्वीट किया, 'मप्र में शासन - प्रशासन मिलकर जनता की आवाज़ को दबाने का कार्य कर रहे है, खरगोन में 6 पत्रकार साथियों पर खनिज अधिकारी से अवैध उत्खनन के मामले में बाइट लेने पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। भाजपा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने का काम कर रही है।' 

जानकारी के मुताबिक खरगोन जिले में रेत का अवैध उत्खनन काफी जोरों पर है। स्थानीय पत्रकारों के पास इस संबंध में रिपोर्ट्स थे कि बीजेपी युवा मोर्चा के नेता व खरगोन नगर के ठेकेदार दिनेश यादव और अमित भावसार द्वारा नियम विरूद्व अवैध रेत स्टॉक और रॉयल्टी दिए बिना टोकन के माध्यम से अवैध वसूली कर रहे थे। इसी बात को लेकर 6 पत्रकार बीते 1 जुलाई को जिला खनिज अधिकारी सावन चौहान के पास गए थे।

पत्रकारों का आरोप है कि माइनिंग ऑफिसर प्रश्न पूछने पर उनके साथ अभद्रता करने लगे। इतना ही नहीं उन्होंने पत्रकारों को गालियां देकर वहां से भगा दिया। इस बात की शिकायत करने सभी पत्रकार जिला कलेक्टर के पास पहुंचे तो उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। लेकिन कलेक्टर ऑफिस से जब वे बाहर निकले तो उन्हें जानकारी मिली कि उल्टा उनके खिलाफ ही डिस्ट्रिक्ट माइनिंग ऑफिसर ने थाने में एफआईआर कर दी है। 

खरगोन कोतवाली में पत्रकार आसिफ खान (NDTV), प्रवीण पाल (मध्यप्रदेश खबर), वाहिद खान (स्टेट न्यूज़), पवन कुमार सोलंकी (दैनिक परिवर्तन), प्रदीप गांगले (नेशन टूडे) और धर्मेंद्र चौहान (दैनिक दीनबंधु) सभी निवासी खरगोन के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट माइनिंग ऑफिसर सावन चौहान ने आईपीसी की धारा 147, 294, 353, 506 और 3(2)(V) के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। 

हैरानी की बात यह है कि चौहान ने अपने एफआईआर में गवाह उन दोनों ठेकेदारों को ही बनाया है जिनपर अवैध उत्खनन और स्टोरेज के आरोप हैं। दिनेश यादव व अमित भावसार जो बीजेपी युवा मोर्चा के नेता हैं और इलाके के दबंग बताए जा रहे हैं, वे ही नगर के ठेकेदार हैं और उन्होंने ही थाने में यह गवाही दी है कि उक्त पत्रकारों ने अधिकारी के साथ बदसलूकी की और सरकारी कार्यों में बाधा पहुंचाया। 

इतना ही नहीं पत्रकारों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में खरगोन जिला पत्रकार संघ ने कहा है कि यह एफआईआर दुर्भावनावश की गई है। संघ के जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा ने कलेक्टर परिसर में लगे कैमरों के फुटेज की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही एससी/एसटी एक्ट के तहत लगाई गई धाराओं को हटाने की मांग की है।