MP: बुरहानपुर का बोरसर बना राज्य का पहला गाली मुक्त गांव, अपशब्द कहने पर पूरे गांव में लगानी होगी झाड़ू

बुरहानपुर का बोरसर राज्य का पहला गाली मुक्त गांव बन गया है। अगर कोई गाली देते पकड़ा गया तो उसे 500 रुपये जुर्माना देना होगा। जुर्माना न देने पर उसे एक घंटे तक गांव की सफाई करनी पड़ेगी।

Updated: Apr 09, 2026, 04:40 PM IST

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव सामाजिक सुधार की अनोखी पहल के तहत राज्य का पहला गाली मुक्त गांव बनकर उभरा है। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इस 6 हजार आबादी वाले गांव में ग्राम पंचायत ने गाली-गलौज पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। नियम के तहत यदि कोई व्यक्ति गाली देते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, जुर्माना न देने की स्थिति में उसे एक घंटे तक गांव की सफाई करनी होगी।

इस पहल की शुरुआत ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की आपसी सहमति से हुई। गांव के सरपंच अंतरसिंह, उपसरपंच विनोद शिंदे और स्थानीय टीवी कलाकार अश्विन पाटिल ने मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाया। दरअसल, अश्विन पाटिल मुंबई में करीब 10 साल बिताने के बाद गांव लौटे थे। तब उन्होंने देखा कि छोटी-छोटी बातों पर होने वाली गाली-गलौज अक्सर बड़े विवादों की वजह बनती है। इसके बाद उन्होंने पंचायत और ग्रामीणों के साथ बैठक कर इस आदत को खत्म करने की पहल की।

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ग्राम पंचायत ने इस निर्णय को लागू करने के लिए पूरे गांव में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया था। घर-घर जाकर लोगों को समझाया गया। वहीं, जगह-जगह पोस्टर और नोटिस लगाए गए थे। इनमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि गाली देने पर दंड या सफाई की सजा दी जाएगी। गांव में मुनादी भी कराई गई जिससे लोगों तक यह संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचा। इस नियम की निगरानी के लिए करीब 20 पंचों की टीम बनाई गई है जो अलग-अलग वार्ड में नजर रखती है।

इस मुहिम का असर अब साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। पंचायत का दावा है कि गांव में अब लोग आपसी बातचीत में शालीन भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और गाली-गलौज पूरी तरह बंद हो गई है। सरपंच विनोद शिंदे के अनुसार, इस फैसले को सभी ग्रामीणों का पूरा समर्थन मिला जिसके चलते यह पहल सफल हो पाई है।

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सिर्फ भाषा सुधार तक ही सीमित न रहकर ग्राम पंचायत ने गांव के समग्र विकास पर भी ध्यान दिया है। युवाओं को शिक्षित और जागरूक बनाने के लिए गांव में पुस्तकालय और वाचनालय शुरू किया गया है। यहां धार्मिक, सामान्य ज्ञान और स्कूली पाठ्यक्रम की किताबें उपलब्ध हैं। इसके अलावा गांव में चार स्थानों पर मुफ्त वाई-फाई सुविधा दी गई है। जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ी है।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हर घर हरियाली अभियान भी चलाया जा रहा है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि शादी, जन्मदिन या अन्य शुभ अवसरों पर मां के नाम एक पौधा जरूर लगाएं। पंचायत द्वारा पौधों का वितरण भी किया जा रहा है।

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