भारत की राजनीति में जुड़ा नया अध्याय, मेनका गुरुस्वामी बनीं पहली LGBTQ राज्यसभा सदस्य
मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। वह भारत की पहली LGBTQ सांसद बनीं। धारा 377 केस में उनकी अहम भूमिका रही थी।
भारत की राजनीति में एक अहम और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर नया अध्याय लिख दिया है। इसके साथ ही वह देश की पहली LGBTQ समुदाय से आने वाली राज्यसभा सांसद बन गई हैं। इसे प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मेनका गुरुस्वामी लंबे समय से संवैधानिक मामलों में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने 2018 में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 से जुड़े ऐतिहासिक मामले में अहम भूमिका निभाई थी। इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। यह LGBTQ+ अधिकारों के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ।
अपने करियर की शुरुआत में मेनका ने 1997 में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के साथ काम किया। उन्हें वह अपना मार्गदर्शक मानती हैं। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का रुख किया। वहां से उन्होंने सिविल लॉ (BCL) की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ में मास्टर्स (LLM) भी किया।
विदेश में पढ़ाई के दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित Davis Polk & Wardwell में एसोसिएट के तौर पर काम किया। उनकी उपलब्धियों के सम्मान में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रोड्स हाउस के मिलनर हॉल में उनका पोर्ट्रेट भी लगाया गया है। यह सम्मान पाने वाली वह पहली भारतीय और दुनिया की दूसरी महिला हैं।
उनकी निजी जिंदगी भी चर्चा में रही है। उनकी पार्टनर अरुंधति काटजू भी पेशे से वकील हैं और धारा 377 के खिलाफ कानूनी लड़ाई में दोनों ने साथ मिलकर पैरवी की थी। 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस धारा को खत्म किया था। हालांकि, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे फिर से लागू कर दिया था। बाद में 2018 के फैसले ने इसे आंशिक रूप से निरस्त कर दिया था।




