इस उम्र में भाषा सीखें या घर चलाएं, मराठी सीखने के खिलाफ मुंबई में ऑटो चालकों की हड़ताल

मुंबई में मराठी भाषा के अनिवार्य नियम के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू की है। गैर-मराठी ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा।

Updated: Aug 25, 2026, 11:10 AM IST

मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर विवाद बढ़ गया है। मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में गैर मराठी भाषी ऑटो रिक्शा चालकों ने सरकार के अभियान के विरोध में तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। चालकों का आरोप है कि उन्हें भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय देने के बजाय नोटिस और जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि नियम केवल बुनियादी बातचीत के स्तर की मराठी जानने तक सीमित है।

परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से ऐसे ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच शुरू की है जिन्हें मराठी बोलने में परेशानी होती है। विभाग के मुताबिक, मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में अब तक करीब 13 हजार ड्राइवरों की जांच की जा चुकी है और लगभग 2,500 नोटिस जारी किए गए हैं। यह अभियान 30 सितंबर तक जारी रहने वाला है।

सरकार की ओर से कहा गया है कि बातचीत की जांच में असफल रहने वाले चालकों को मराठी सीखने के लिए नोटिस दिया जाएगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 19 अगस्त को कहा था कि पहले ड्राइवरों को नोटिस देकर तीन महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद भी मराठी नहीं सीखने पर लाइसेंस और बैज निलंबित किया जा सकता है। हालांकि, मौजूदा कार्रवाई को लेकर ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें कई मामलों में केवल एक महीने का कारण बताओ नोटिस दिया जा रहा है।

गैर मराठी भाषी चालकों का कहना है कि उम्रदराज लोगों के लिए इस उम्र में नई भाषा सीखना आसान नहीं है। कई ड्राइवरों ने कहा कि उन्होंने कभी औपचारिक पढ़ाई नहीं की और उनके सामने परिवार का खर्च चलाने के साथ साथ वाहन की किश्त भरने की जिम्मेदारी भी है। उनका सवाल है कि 55-60 साल की उम्र में वे परिवार चलाने पर ध्यान दें या नई भाषा सीखने की प्रक्रिया में लगें।

प्रदर्शन कर रहे चालकों का दावा है कि वे मराठी सीखने और कामचलाऊ मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि 15 से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना उनके लिए मुश्किल है। एक चालक ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता वे तीन दिन तक हड़ताल जारी रखेंगे।

एक अन्य ऑटो चालक ने बताया कि मराठी सीखने के लिए केवल चार सेशन आयोजित किए गए जो उसके मुताबिक पर्याप्त नहीं हैं। उसने कहा कि वह अभी भी परेशानी में है और उसे समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा। उसके ऊपर वाहन की किश्त चुकाने की जिम्मेदारी है और कार्रवाई के कारण वह खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा है।

सेवा सारथी ऑटो रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने नियम को लेकर एक अहम सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकार ने ड्राइवरों के लिए मराठी का वर्किंग नॉलेज जरूरी किया है लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस शब्द का व्यावहारिक अर्थ क्या है और कितनी मराठी जानना अनिवार्य होगा।

गोसावी के मुताबिक, नियम की स्पष्टता नहीं होने पर RTO स्तर पर भ्रष्टाचार और ड्राइवरों के आर्थिक शोषण की आशंका पैदा हो सकती है। महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाने वाले बड़ी संख्या में लोग उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे राज्यों से आए हैं। इनमें कई ऐसे हैं जो मराठी बिल्कुल नहीं जानते या सिर्फ थोड़ी-बहुत मराठी बोल पाते हैं। ऐसे चालकों को लाइसेंस और परमिट रद्द होने की चिंता सता रही है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां हैं। इनमें से बड़ी संख्या मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी MMR में संचालित होती है। सरकार करीब छह लाख ऑटो टैक्सी चालकों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना चाहती है।

मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, कुछ महीने पहले शुरू की गई इस पहल के तहत अब तक 1,65,601 ड्राइवर इसमें शामिल हो चुके हैं। सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों को परेशान करना नहीं बल्कि यात्रियों से बुनियादी संवाद के लिए जरूरी भाषा ज्ञान सुनिश्चित करना है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए लागू मराठी भाषा की शर्त का दायरा सीमित है। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों से मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनने की अपेक्षा नहीं की जा रही है। उन्हें केवल यात्रियों और आम लोगों से बुनियादी बातचीत करने लायक मराठी आनी चाहिए।

फडणवीस ने यह भी कहा कि महायुति सरकार भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। जरूरत पड़ने पर ऑटो और टैक्सी चालकों को कामचलाऊ मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

मराठी भाषा नियम को लागू कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का ऑटो-रिक्शा से पुराना संबंध रहा है। राजनीति में आने से पहले वह ठाणे की सड़कों पर ऑटो-रिक्शा चलाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के कारण उन्होंने शुरुआती दौर में अगरबत्ती और कैलेंडर बेचकर भी काम किया था।