Congress: पार्टी में बदलाव के लिए कांग्रेस नेताओं का सोनिया गांधी को पत्र

Letter to Sonia Gandhi: सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कांग्रेस अध्यक्षों को ज्यादा स्वतंत्रता देने की मांग, बीजेपी के सांप्रदायिक एजेंडे पर जताई चिंता

Updated: Aug 23, 2020 11:41 PM IST

Congress: पार्टी में बदलाव के लिए कांग्रेस नेताओं का सोनिया गांधी को पत्र
Photo Courtesy: Indian Express

नई दिल्ली। पार्टी में बड़े बदलावों की मांग करते हुए कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। इन नेताओं में पांच पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान सांसद, पूर्व सांसद और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य शामिल हैं। पत्र में बीजेपी की बढ़ती हुई ताकत को संज्ञान में लेते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में युवाओं ने नरेंद्र मोदी को वोट किया है। कांग्रेस पार्टी अपना आधार और युवाओं का विश्वास खो रही है। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी में नेतृत्व को लेकर 24 अगस्त को चर्चा होनी है। 

इस पत्र पर राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पार्टी के वरिष्ठ सांसद आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर, विवेक तन्खा, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी सदस्य मुकुल वासनिक, जितिन प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भूपिंदर सिंह हूडा, राजेंदर कौर, वीरप्पा मोइली, पृथ्वीराज चह्वाण, पीजे कुरियन, अजय सिंह, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर इत्यादि के हस्ताक्षर हैं।

पत्र की मुख्य बातें

पत्र में एक दीर्घकालिक और असरदार नेतृत्व बनाने की बात कही गई है, जो ना केवल दिखे बल्कि काम करता हुआ भी नजर आए। पार्टी में वापस से जान फूंकने के लिए संस्थागत अगुवाई वाले ढांचे को गठित करने की बात कही गई है।

पत्र में बताया गया है कि पार्टी का फिर से खड़ा होना देश के लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है। खासकर बीजेपी और संघ परिवार के सांप्रदायिक एजेंडे, देश में बने डर के माहौल, आर्थिक मंदी और तेजी से बढ़ती जा रही बेरोजगारी, कोरोना वायरस महामारी से खड़ी हुई दिक्कतों और सीमा पर व्याप्त चुनौतियों के बीच।

पत्र में एक बड़े सुधार की मांग करते हुए शक्ति के विकेंद्रीकरण, राज्य कांग्रेस इकाइयों को ज्यादा शक्ति देने और पार्टी संगठन में हर स्तर पर चुनाव कराने की मांग की गई है।

यह रेखांकित किया गया है कि पार्टी नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कार्यकर्ता हतोत्साहित हुए हैं, जिससे पार्टी कमजोर पड़ी है। यह भी कहा गया है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी बीजेपी सरकार के खिलाफ जनता का नजरिया बदलने में प्रभावशाली तरीके से काम नहीं कर रही है।

पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस संसदीय दल में चर्चा नहीं हो रही है और कांग्रेस अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति में देरी की जा रही है। जिन नेताओं का राज्य में सम्मान है, अच्छी छवि है उन्हें बहुत देर से नियुक्ति दी जा रही है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों को फैसले लेने के लिए स्वतंत्रता भी नहीं  मिल रही है।