भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, सस्ती होंगी ब्रिटिश कारें, व्हिस्की और फैशन प्रोडक्ट्स

भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई से लागू हो गया है। इसके तहत 99 प्रतिशत भारतीय उत्पाद ब्रिटेन में टैक्स-फ्री बिकेंगे। वहीं, भारत में ब्रिटिश लग्जरी कारें, स्कॉच व्हिस्की और अन्य प्रीमियम चीजें काफी सस्ती हो जाएंगी।

Updated: Jul 15, 2026, 04:11 PM IST

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) बुधवार 15 जुलाई से लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक शुल्क (टैरिफ) में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन में बिना किसी आयात शुल्क (जीरो टैरिफ) के प्रवेश मिलेगा। जबकि, ब्रिटेन से आने वाले अधिकांश सामानों पर भारत में औसत टैरिफ घटकर करीब 3 प्रतिशत रह जाएगा। दोनों देशों का लक्ष्य है कि साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाए।

करीब साढ़े तीन साल चली बातचीत और 14 दौर की वार्ताओं के बाद 24 जुलाई 2025 को इस समझौते पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए थे। समझौता लागू होने से पहले भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे दोनों देशों की साझेदारी के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा था कि यह आर्थिक विकास के नए दौर की शुरुआत करेगा।

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इस समझौते का सबसे सीधा असर भारतीय बाजार में दिखाई देगा। ब्रिटेन से आयात होने वाली कई लग्जरी और प्रीमियम वस्तुएं पहले की तुलना में सस्ती हो जाएंगी। स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाला 150 प्रतिशत आयात शुल्क घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इसे अगले दस सालों में 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इसी तरह जगुआर लैंड रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी ब्रिटिश लग्जरी कारों पर लागू ऊंचे टैरिफ को कोटा व्यवस्था के तहत 10 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा। जिससे इनकी कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन, लैंब, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, मेडिकल उपकरण, एयरोस्पेस पार्ट्स, ब्रांडेड कपड़े, होमवेयर, फर्नीचर और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी अपेक्षाकृत सस्ते होंगे।

दूसरी ओर भारतीय उद्योगों को भी इस समझौते से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। ब्रिटेन ने भारतीय टेक्सटाइल और होम टेक्सटाइल उत्पादों पर पहले लगने वाले 8 से 12 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इससे भारतीय कपड़ा उद्योग को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बढ़त मिलेगी। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे प्रमुख निर्यात केंद्रों में आने वाले सालों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

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रत्न एवं आभूषण, चमड़े के उत्पाद, बैग और जूते जैसे क्षेत्रों को भी शुल्क समाप्त होने का लाभ मिलेगा। इससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए ब्रिटेन का बाजार अधिक आकर्षक बनेगा। इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी और ऑटो पार्ट्स पर ब्रिटेन द्वारा आयात शुल्क खत्म किए जाने से पुणे, चेन्नई और गुरुग्राम जैसे औद्योगिक केंद्रों को भी निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन में जेनेरिक दवाओं के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। जिससे वहां की स्वास्थ्य सेवाओं तक भारतीय दवाओं की पहुंच और तेज होगी। वहीं, बासमती चावल, झींगा, प्रीमियम चाय, मसाले और अन्य खाद्य उत्पादों पर भी ब्रिटेन का आयात शुल्क समाप्त होने से असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की निर्यात क्षमता मजबूत होगी। गुजरात और महाराष्ट्र के केमिकल उद्योगों को भी विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। जबकि, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संयुक्त निवेश और तकनीकी सहयोग का रास्ता खुलेगा।

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सरकार का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को भी गति देगा। 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से टेक्सटाइल, चमड़ा, इंजीनियरिंग, समुद्री उत्पाद, रत्न-आभूषण और अन्य निर्यात आधारित उद्योगों का विस्तार होगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे खासकर श्रम आधारित क्षेत्रों में। देश के करीब 6 करोड़ MSME को नए बाजार और बेहतर व्यापारिक अवसर मिलेंगे। जबकि, ब्रिटेन की कंपनियों द्वारा भारत में आईटी, वित्तीय सेवाओं और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है।

भारत और ब्रिटेन के बीच इस समझौते पर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी जो करीब साढ़े तीन सालों बाद अंतिम रूप तक पहुंची। इससे पहले भारत मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के साथ भी इसी तरह के व्यापार समझौते कर चुका है। भारत फिलहाल यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत आगे बढ़ा रहा है ताकि वैश्विक बाजारों में भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी और बढ़ाई जा सके।

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विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फोकस अब एशियाई देशों से आगे बढ़कर पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की ओर केंद्रित हो गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का मानना है कि ब्रिटेन के साथ लागू हुआ यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है और आने वाले वर्षों में निर्यात, निवेश तथा औद्योगिक विकास को नई गति देगा।