बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिलेगी 12 प्रतिशत से ज्यादा अल्कोहल वाली दवा, स्टोर्स को 3 साल का रिकॉर्ड रखना जरूरी

केंद्र सरकार ने नशे पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 12% से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं और कफ सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी।

Updated: Jul 10, 2026, 06:20 PM IST

केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल युक्त दवाओं की बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर सख्ती करते हुए नए नियम लागू किए हैं। अब 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतलों में उपलब्ध ऐसी दवाएं डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के बिना न तो खरीदी जा सकेंगी और न ही बेची जा सकेंगी। सरकार ने दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन किया है। इसके साथ ही मेडिकल स्टोर्स के लिए इन दवाओं की बिक्री का अलग रजिस्टर में रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

सरकार का मानना है कि बाजार में उपलब्ध कई कफ सिरप और टॉनिक में अल्कोहल की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। बिना किसी निगरानी के इनकी बिक्री होने से कुछ लोग इनका इस्तेमाल नशे के लिए करने लगे थे। इसी बढ़ते दुरुपयोग को रोकने और बिक्री प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है। इससे पहले सरकार जून में कफ सिरप को उन दवाओं की सूची से भी बाहर कर चुकी है जिन्हें बिना डॉक्टर की सलाह सीधे मेडिकल स्टोर से खरीदा जा सकता था। गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश में दूषित सिरप पीने से 26 बच्चों की मौत का मामला भी सामने आया था। जिसके बाद दवाओं की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

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यह बदलाव सरकार की रेगुलेटरी संस्थाओं ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर किया गया है। दोनों समितियों ने दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कानून में संशोधन की अनुशंसा की थी।

नए नियम लागू होने के बाद मेडिकल स्टोर्स को कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी होंगी। अब ऐसी दवाएं केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकेंगी। फार्मेसी संचालकों को मरीज, डॉक्टर और दवा से जुड़ी पूरी जानकारी अलग रजिस्टर में दर्ज कर कम से कम तीन साल तक सुरक्षित रखनी होगी। दवा के पैक पर लाल रंग का Rx चिन्ह और शेड्यूल H1 की चेतावनी भी अनिवार्य होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन दवाओं पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और न ही इन्हें असुरक्षित घोषित किया गया है। यदि किसी मरीज को डॉक्टर ने ऐसी दवा लिखी है तो वह पहले की तरह मेडिकल स्टोर से उपलब्ध होगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब दवा लेने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाना जरूरी होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं में सीमित मात्रा में एथिल अल्कोहल का उपयोग सॉल्वेंट और प्रिजर्वेटिव के रूप में किया जाता है जो दवा को सुरक्षित रखने और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक होता है। सामान्य परिस्थितियों में यह हानिकारक नहीं माना जाता। हालांकि, बिना चिकित्सकीय सलाह या जरूरत से अधिक मात्रा में सेवन करने पर बच्चों, बुजुर्गों और लिवर की बीमारी से पीड़ित मरीजों में गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। साल 2024 में प्रकाशित जर्नल ऑफ मेडिकल टॉक्सिकोलॉजी की रिपोर्ट में भी इस जोखिम का उल्लेख किया गया है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी दवाओं के विवेकपूर्ण और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार ही उपयोग पर जोर देता है।

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गौरतलब है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के तहत शेड्यूल H1 को साल 2013 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य उन दवाओं की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखना था जिनके दुरुपयोग की आशंका अधिक रहती है। शुरुआत में इस सूची में उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स, टीबी की दवाएं और लत लगाने वाली कुछ दवाएं शामिल थी। अब 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली दवाओं को भी इस दायरे में लाने से दवाओं की ट्रेसेबिलिटी बढ़ेगी, बिक्री पर बेहतर निगरानी होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।