महाकवि भारतियार की चॉकलेट मूर्ति, पुडुचेरी में बेकर ने बनाई डार्क चॉकलेट से आदमकद प्रतिमा

कवि, समाजसुधारक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पत्रकार थे सुब्रह्मण्य भारती, लोग उन्हें प्यार से महाकवि भारतियार कहते थे, वे कई भाषाओं के जानकार थे, क्रिसमस के मौके पर पुडुचेरी की बेकरी में 6.6 फीट की चॉकलेट प्रतिमा बना कर किया याद

Updated: Dec 17, 2021, 04:27 PM IST

महाकवि भारतियार की चॉकलेट मूर्ति, पुडुचेरी में बेकर ने बनाई डार्क चॉकलेट से आदमकद प्रतिमा
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पुडुचेरी की एक बेकरी ने इस साल क्रिसमस सेलिब्रेशन का खास तैयारी की है। बेकरी ने डार्क चॉकलेट से एक आदमकद प्रतिमा बनाई है। यह प्रतिमा महाकवि भारतियार की है। इस चॉकलेटमूर्ति की हाइट 6.6 फीट है। डार्क चॉकलेट महाकवि की मूर्ती का निर्माण यहां के बेकर थंगमटेनरासु ने किया है। उनका कहना है कि वे साल क्रिसमस और न्यू इयर के खास मौके से पहले डार्क चॉकलेट से देश विदेश की प्रतिष्ठित हस्तियों की मूर्तियों का निर्माण करते हैं।

कौन थे महाकवि भारतियार

भारतियार का असली नाम सुब्रह्मण्य भारती था। उनका जन्म 11 दिसंबर 1882 में हुआ था, और उनका निधन 11 सितंबर  1921 में हुआ था। वे एक तमिल कवि थे। जिन्हें लोग महाकवि भारतियार के नाम से जानते हैं। वे देश भक्ति कविताओं के लिए जाने जाते हैं। देश भक्ति उनमें कूट-कूट कर भरी हुई थी। वे एक जानेमाने कवि के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। उन्होंने अपने दौर में पत्रकारिता के माध्यम से समाज सुधार का कार्य भी किया। वे जितना प्रसिद्ध दक्षिण में थे उतनी ही ख्याति उत्तर भारत में भी थी। वे उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच एकता के सेतु की मानिंद थे।

महाकवि भारती के नाम से प्रसिद्ध सुब्रह्मण्यम भारती की गिनती तमिल भाषा के ही नहीं बल्कि देश के बड़े राष्ट्रवादी कवियों में गिने जाते हैं। वे अपनी बुद्धिमता, लेखन, दर्शन और देशप्रेम के लिए प्रसिद्ध हैं। वे हिंदी, तमिल, बंगाली, संस्कृत, फ्रेंच और अंग्रेजी भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ रखते थे। उनकी काव्य शक्ति इतनी प्रखर थी, कि अल्पायु में ही कविताओं की रचना करने लगे थे। यही वजह थी कि 11 साल की उम्र में ही उनको भारतीय की उपाधि से प्रदान कर दी गई थी। सुब्रमण्यम भारती ने देश के महान नायकों पर कविताएं लिखी थी। उन्होंने महिलाओं की मुक्ति के लिए लड़ाई लड़ी, बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई, ब्राह्मणवाद और धर्म में सुधार के लिए काम किया। वह दलितों और मुसलमानों के साथ एकजुटता से आजीवन खड़े रहे।