जी भाईसाहब जी: ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक और तस्वीर वायरल
MP Politics: इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए टिप्पणियां की गई हैं कि यही वह सम्मान है जिसकी चाह में महाराज कहे जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी को छोड़ कर बीजेपी की सदस्यता ले ली थी।
कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में गए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक तस्वीर वायरल हो रही है। यह तस्वीर बीजेपी के नए अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया में जुट एमपी बीजेपी के नेताओं की है। बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने जाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत बीजेपी के 20 नेता प्रस्तावक बनाए गए थे। वायरल हो रही तस्वीर इसी कार्यक्रम की बताई जा रही है। तस्वीर ने प्रस्तावक बने 20 बीजेपी नेता दिखाई दे रहे हैं। मगर इस तस्वीर में ज्योतिरादित्य सिंधिया बहुत खोजने पर दिखाई देते हैं। वे अंतिम पंक्ति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ पीछे से झांकते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए टिप्पणियां की गई हैं कि यही वह सम्मान है जिसकी चाह में महाराज कहे जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी को छोड़ कर बीजेपी की सदस्यता ले ली थी। गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में कांग्रेस छोड़ने के दौरान, एक वीडियो के माध्यम से "उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है" का हवाला देकर कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती दी थी। इसके बाद बीजेपी में उनके साथ होने वाले व्यवहार पर इसी शेर का हवाला दे कर तंज कसा जाता है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया पर टिप्पणी करने वाले अधिकांश लोगों की राय है कांग्रेस में उन्हें महाराज और श्रीमंत कह कर सम्मान दिया जाता था। उनकी मर्जी के बिना ग्वालियर की राजनीति में पत्ता नहीं खड़कता था। अब वे बीजेपी में एक गुट के नेता बन कर रहे गए हैं। एक जमाने में गांधी परिवार से सबसे करीबी नेता होने के कारण वे स्वाभाविक रूप से सम्मान और अधिकार सहज पा जाते थे। जबकि अब वे बीजेपी में मंच पर भी प्रमुख कतार में स्थान नहीं पा रहे हैं। वायरल हो रही तस्वीर यही बता रही है कि वे पार्टी में खास नहीं सब नेताओं जैसा आम दर्जा रखते हैं।
मुझे कैलाश विजयवर्गीय समझा है क्या
एक दौर था जब इंदौर ही नहीं, मध्यप्रदेश में कैलाश विजयवर्गीय की तूती बोलती थी। प्रदेश ही क्यों वे बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व के पसंदीदा नेताओं में शामिल हुआ करते थे। इस बात को ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। आज भी कैलाश विजयवर्गीय की राजनीति का अपना महत्व है। उनके साथी रहे नेताओं ने उन्हें पीछे धकेलने के खूब जतन किए लेकिन वे हर बार संकट से बाहर निकल कर अधिक प्रभाव से उभरे। लेकिन इस बार जैसे पानी सिर से ऊपर चला गया है।
पहले तो नगरीय विकास और प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से सैकड़ों लोग बीमार हुए। देखते ही देखते, इलाज के बाद भी 25 लोग अब तक दम तोड़ चुके हैं। ऐसी स्थिति में दूसरे नेता तो बच गए लेकिन कैलाश विजयवर्गीय ‘निपट’ गए। इस निपटने में मीडिया कर्मी को दिया गया बेहुदा बयान भी एक कारण बना। तैश में कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर जबान में ऐसा कुछ कह दिया कि उनका बयान पल भर में देश में छा गया।
आकलन है कि इस घटना ने कैलाश विजयवर्गीय के कद को छोटा कर दिया। यह कुछ-कुछ ऐसा ही था जैसे उनके बेटे आकाश विजयर्गीय ने विधायक रहते हुए नगरनिगम कर्मचारी को क्रिकेट बैट ने पीट दिया था। कैलाश इंदौर में अपनी जमीन बचाने का प्रयास कर रहे थे दिल्ली ने उनकी राजनीतिक जमीन खिसका दी। जब लग रहा था कि कैलाश विजयवर्गीय सबकुछ ठीक रहे हैं तब अचानक एक पत्र सामने आता है। उनके सहायक ने सूचना दी कि परिवार में किसी की मृत्यु के कारण वे 10 दिनों तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेंगे। इस सूचना का यही अर्थ लगाया गया कि पार्टी नेतृत्व ने कैलाश विजयवर्गीय को छुट्टी पर भेज दिया है।
एक समय था जब हर कोई कैलाश विजयवर्गीय जैसा नेता होना चाहता था। अब नेता कैलाश हो जाने से डर रहे हैं। मंत्री विजय शाह अपने विवादास्पद बयानों से पहले ही सर्वोच्च न्यायालय की फटकार झेल रहे हैं। उनकी कुर्सी खतरे में हैं। इन दो मंत्रियों की स्थिति देख दूसरे मंत्री डर गए हैं। वे विवाद से दूर रहना चाहते हैं और इसी कारण वे विवादों और मीडिया के सवालों से बच रहे हैं। पिछले दिनों कटनी पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने पत्रकारों के कई सवालों के जवाब दिए। अंत में कुछ सवालों से दूरी बनाते हुए मंत्री इंदर सिंह परमार ने पत्रकारों से कहा कि "ये सवाल मेरे स्तर के नहीं, मुझे कितना भी उकसाओं। मैं कैलाश विजयवर्गीय की तरह आप लोगों की बातों में फंसने वाला नहीं हूं।"
शिवराज तो शिवराज है, आम के आम…
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हमेशा चर्चा में बने रहने का हुनर जानते हैं। सबसे ज्यादा समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान की तत्काल बुद्धि और समय की नजाकत देख काम करने की रणनीति उन्हें अपने समकालीन नेताओं से आगे रखती हैं। खबरों में बने रहने के लिए कई बार जतन और प्रबंधन किए जाते हैं और कई बार कोई संयोग बन जाता है। ऐसा ही संयोग इस गणतंत्र दिवस पर हुआ। दिल्ली में हुए मुख्य समारोह की वायरल हुई एक तस्वीर ने शिवराज को चर्चित कर दिया जबकि यह तस्वीर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कारण वायरल हुई।
दरअसल, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे तथा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को गणतंत्र दिवस की परेड में पीछे की कतार में चौथे क्रम की कुर्सी दी गई थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित कई लोगों ने इसे नेता प्रतिपक्ष का अपमान बताया। इस मामले पर पक्ष-विपक्ष में तकरार जारी है लेकिन राहुल गांधी के कारण कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी वायरल हो गए। तस्वीर में शिवराज सिंह चौहान अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ अगली पंक्ति में बैठे दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर वायरल हुई तो लोग इसके पीछे शिवराज सिंह चौहान से जुड़ा कारण खोजने लगे। बाद में ध्यान गया कि पीछे राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बैठे हैं। तस्वीर वायरल होने का कारण तो विपक्ष के नेता को पीछे सीट देने के निर्णय था लेकिन आगे बैठे शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह प्रमुखता से रेखांकित हो गए। यानी, प्रसिद्धि शिवराज के साथ है, कारण और संदर्भ कुछ भी हो।
बीजेपी में सहयोग से समाधान, क्या कम करेगा दु:ख
प्रदेश में अनेक जिलों से बीजेपी कार्यकर्ताओं में आपसी सिर फुटव्वल चल रही है। हर कोने में कोई न कोई झगड़ा है। गुटों में उलझे पदाधिकारी कार्यकर्ताओं की बात तक नहीं सुनते हैं। जिला स्तर पर अपनी सुनवाई न होने के कारण कार्यकर्ता बार-बार भोपाल आकर प्रदेश कार्यालय में चक्कर लगाते हैं। इस वजह से प्रदेश कार्यालय में नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ देखी जा रही थी। इससे निपटने के लिए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक परमानेंट 'सहयोग सेल' का गठन कर रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य पार्टी कार्यकताओं की शिकायतों और समस्याओं का जल्द समाधान करना है। इस सेल में प्रदेश संयोजक और जिला संयोजक की नियुक्ति की जाएगी, ताकि संगठनात्मक स्तर पर बेहतर समन्वय बनाया जा सके। सहयोग सेल में प्रशासनिक अनुभव का लाभ लेने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है। संगठन जिला कार्यालयों में पदाधिकारियों के बैठने के दिन भी तय करेगा।
इन निर्धारित दिनों में पदाधिकारी कार्यालय में मौजूद रहकर आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और उनके निराकरण की दिशा में कार्रवाई करेंगे। कार्यकर्ता खुश है कि उनकी शिकायतों को सुनने की एक संभावना और बनी। समाधान हो न हो कम से कम कार्यकताओं को यह तो लगे कि उनकी सुनवाई हो रही है।




