दफ्तर दरबारी: क्या करें आईएएस, फार्म हाउस में जुआरी घुस आए थे
MP Police: कुछ माह पहले मंत्री प्रतिमा बागरी के भाई और जीजा नशे के अवैध कारोबार में पकड़े गए है। अब आईएएस के फार्म हाउस पर जुआ पकड़े जाने से प्रदेश में अपराधियों की पैठ और पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इंदौर जिले के मानपुर में आईएएस वंदना वैद्य के पति के फार्महाउस पर जुआ पकड़ा गया है। स्थानीय पुलिस को जानकारी दिए बगैर हुई कार्रवाई में जुआ खेल रहे 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया जबकि आधा दर्जन फरार हो गए। पकड़े गए सभी आरोपी इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और झाबुआ आदि स्थानों के उच्च संपर्कों वाले परिवारों से हैं। पकड़े गए आरोपियों के पास से करीब 14 लाख रुपए, 25 मोबाइल फोन, 2 कार और अन्य सामग्री बरामद की गई है।
इस मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानी गई थी इसलिए पुलिस थाने को बगैर बताए छापा मारा गया। इसके बाद मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिंहौरे और दो अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। कांड के खुलासा होने के बाद आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य का पुलिस को भेजा गया पत्र चर्चा में है। इंदौर में वित्त विकास निगम में पदस्थ आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य ने लिखा है कि कुछ अज्ञात लोग उनके परिवार के फार्महाउस में बिना अनुमति के घुस आए थे और वहां गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे। उन्होंने फार्म हाउस पर चोरी की आशंका भी जताई है।
कुछ माह पहले मंत्री प्रतिमा बागरी के भाई और जीजा नशे के अवैध कारोबार में पकड़े गए है। अब आईएएस के फार्म हाउस पर जुआ पकड़े जाने से प्रदेश में अपराधियों की पैठ और पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है। संभव है कि मंत्री और आईएएस इन गतिविधियों से वाकिफ न हों लेकिन पूरी संभावना है कि अपराधिक गतिविधियों में उनके नाम और प्रभाव का इस्तेमाल हुआ है। बिना अनुमति घुस आए लोगों पर जितनी कार्रवाई आवश्यक है, उतनी ही सख्त कार्रवाई उन पर भी जो पद के प्रभाव का इस्तेमाल कर अपराध को प्रश्रय दे रहे हैं।
कुर्सी गई, खाली हाथ रह गए आईएएस, आईपीएस
राज्य सरकार ने दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तय कर दी है। जल्द आदेश हो जाएंगे। दोनों प्रशासनिक क्षेत्र से हैं। एक, आलोक नागर फर्म्स एंड सोसायटी के रजिस्ट्रार रहे हैं तो दूसरे, राजेश भट्ट आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी रहे हैं। आयोग में 3 पदों के लिए आवेदन मंगवाए गए थे। इन पदों के लिए कुल 185 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदन करने वालों में 8 सेवानिवृत्त आईएएस,3 आईपीएस, 3 आईएफएस, 17 प्रशासनिक अधिकारी, 32 अधिवक्ता, 51 पत्रकार शामिल थे। दो वर्तमान आईएएस संजय मिश्रा और वंदना वैद्य ने भी सूचना आयुक्त बनने की इच्छा जताई थी।
आमतौर पर इन पदों पर रिटायर्ड अधिकारियों और पत्रकारों की नियुक्ति की जाती रही है। यही कारण है कि रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस इन पदों को पुनर्वास का मुख्य जरिया मानते हैं। सूचना आयुक्त पद के लिए रिटायर्ड आईपीएस पवन श्रीवास्तव, जीपी सिंह और मुकेश जैन ने आवेदन किया था। रिटायर्ड आईएएस संजय गुप्ता, वीरेन्द्र सिंह रावत, नरेश पाल, राजेश कौल, रवींद्र सिंह और श्रीनिवास शर्मा ने भी इस पद पर पुनर्वास की उम्मीद जताई थी।
सूचना आयोग में नियुक्तियां हमेशा प्रतिष्ठा का विषय रही है। माना जाता है कि बीजेपी सरकारों में ये नियुक्तियां आरएसएस और संगठन की सहमति के बिना नहीं होती है। इस बार भी दो नाम चौंकाने वाले रहे। साफ है कि अपेक्षाकृत लो प्रोफाइल आवेदकों को चुन कर सरकार ने बीजेपी की उस नीति का ही पालन किया है जिसमें चौंकाना तथा नए लोगों पर भरोसा जताना पहली शर्ता है।
साहब कहां जाएंगे, क्या मैडम आएंगी?
प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों तबादलों पर अटकलों का दौर है। सोशल मीडिया पर प्रशासन से जुड़ी पोस्ट में सबसे ज्यादा इसी बात के कयास है कि किस जिले को नया मुखिया मिलने वाला है और कौन अफसर अपनी मैदानी पोस्टिंग बचाने में कामयाब होगा। मतदाता सूचियों का काम पूर्ण हो गया है और अब लंबे समय से एक ही पद पर टिके कलेक्टरों को हटाया जाना तय है। इन कलेक्टरों में इनमें केदार सिंह (शहडोल), प्रतिभा पाल (रीवा), स्वरोचिष सोमवंशी (सीधी), नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी (बैतूल), नेहा मीना (झाबुआ), सोनिया मीना (नर्मदापुरम), सुधीर कोचर (दमोह),ऋजु बाफना (शाजापुर),रानी बाटड़ (मैहर) और अदिति गर्ग (मंदसौर) के नाम चर्चाओं में हैं। इसके साथ ही रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम और भोपाल के डिविजनल कमिश्नर भी बदले जाएंगे।
भोपाल के कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह का सचिव स्तर पर प्रमोशन हो चुका है। उनका तबादला तय है। वे किसी संभाग में आयुक्त बनाए जाएंगे। भोपाल के नए कलेक्टर को लेकर तीन प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं। इनमें ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास निगम के सीईओ दीपक आर्य के नाम भी संभावित भोपाल कलेक्टर हैं। मुख्य सचिव अनुराग जैन के छुट्टी से लौटने पर तबादला सूची आने की संभावना बताई गई थी यानी ईद के बाद ही सूची आएगी।
आईएएस अफसरों के अलावा आईपीएस अफसरों को भी अपने तबादले का लंबे समय से इंतजार है मगर पीएचक्यू और मंत्रालय में तालमेल न होने के कारण तबादला सूची बार-बार अटक जाती है।
महिला आईएएस के व्यवहार से दु:खी हुए पूर्व आईपीएस
रिटायर्ड एडीजीपी और राज्य सूचना आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड आईपीएस विजय यादव इन दिनों दु:खी हैं। उनके दु:ख का कारण्र कोई और नहीं आयोग की सचिव हैं। वे इस बात से परेशान नहीं है कि सरकार ने आयोग में सचिव के रूप में प्रमोटी महिला आईएएस को भेज दिया है बल्कि उनके दु:ख का कारण आयोग में सचिव नियुक्त हुई आईएएस वंदना शर्मा का व्यवहार है। जनवरी में तबाले के बाद आईएएस वंदना शर्मा पद संभालते ही लंबी छुट्टी पर चली गईं। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड आईपीएस विजय यादव से औपचारिक मुलाकात करना मुनासिब भी नहीं समझा।
दु:खी आईपीएस विजय यादव को ‘बदला’ लेने का मौका भी जल्द ही मिल गया जब आयोग सचिव की अनुपस्थिति के कारण कर्मचारियों की तनख्वाह जारी नहीं हुई। इसे मुद्दा बनाते हुए उन्होंने सरकार को पत्र लिख दिया। मुद्दा जो भी हो, आईपीएस विजय यादव ने आयोग सचिव के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर तो कर ही दी।
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