ईकॉमर्स कंपनी अमेजन को खाद में लूट की छूट क्यों दे रही है सरकार, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के रीट्वीट से मचा बवाल

नेशनल लाइसेंस के बिना भारत में सरकारी रेट से 27 गुना महंगी खाद बेच रही है ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुमोदन को कृषि विशेषज्ञों ने बताया गैरक़ानूनी, तोमर को जेल भेजने की उठी मांग

Updated: Sep 03, 2021, 12:59 PM IST

ईकॉमर्स कंपनी अमेजन को खाद में लूट की छूट क्यों दे रही है सरकार, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के रीट्वीट से मचा बवाल

नई दिल्ली। देश के कई राज्य खाद की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं। मॉनसून की बारिश के बाद अब किसान खाद के लिए भागदौड़ में जुटे हुए हैं। केंद्र सरकार ने खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए रेट तय कर दिए हैं। हालांकि, ई-कॉमर्स कंपनियों को न सिर्फ लूट की छूट दी जा रही है, बल्कि खुद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इस कालाबाजारी को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से बढ़ावा दे रहे हैं। किसान नेताओं ने इसे बेहद शर्मनाक करतूत करार देते हुए तोमर के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजने की मांग की है।

दरअसल, बहुराष्ट्रीय कंपनी अमेजन की भारतीय इकाई ने देश में किसान स्टोर लॉन्च किया है। अमेजन इंडिया ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसकी जानकारी दी है। खास बात यह है कि अमेजन के इस ट्वीट को केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रिट्वीट कर एक तरह से अनुमोदित कर दिया है। हम समवेत ने जब अमेजन की वेबसाइट पर इस स्टोर की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 

अमेजन ने अपने किसान स्टोर पर 46 फीसदी नाइट्रोजन वाली नीम कोटेड यूरिया खाद की कीमत 199 रुपए प्रति किलो रखा है। इसपर 20 फीसदी छूट की बात कही गई है, यानी छूट के साथ किसानों को 159.2 रुपए प्रति किलो खाद मिलेगी। जबकि खाद का देशभर में सरकारी रेट प्रति बोरी 266.5 रुपए ही है। यानी सरकार ने यूरिया की कीमत 5.92 रुपए प्रति किलो तय की है। सरकारी नियम के मुताबिक कोई भी खाद विक्रेता यदि किसानों से इससे ज्यादा रकम वसूलते पाया जाता है तो उसे कालाबाजारी के आरोप में जेल भेजने का प्रावधान है। 

यानी ई-कॉमर्स कंपनी सरकार द्वारा तय किए गए रेट से करीब 27 गुना ज्यादा दाम पर देश में यूरिया न सिर्फ बेच रही है, बल्कि कृषि क्षेत्र से सर्वोच्च पद पर बैठे नरेंद्र सिंह तोमर उसे प्रोमोट भी कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यूरिया पर केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाती है। सरकार तकरीबन 700 रुपए प्रति बोरी सब्सिडी देती है। सब्सिडी को हटा भी दिया जाए तो प्रति किलो खाद का दाम 21.48 रुपए ही पड़ता है। यानी बगैर सब्सिडी के भी देखा जाए तो अमेजन कंपनी साढ़े सात गुना महंगी खाद बेच रही है।

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भारत में खाद बेचने के लिए नेशनल लाइसेंस का भी प्रावधान है। यानी खाद बेचने के लिए रिटेलर्स को पहले केंद्र सरकार से लाइसेंस प्राप्त करना पड़ता है। वैसे तो कोई व्यक्ति अथवा कंपनी बिना लाइसेंस खाद बिक्री नहीं कर सकती, लेकिन अमेजन के इस कदम से कई सवाल खड़े हो गए हैं। वरिष्ठ कृषि पत्रकार अजीत सिंह का कहना है कि, 'क्या सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को उर्वरक और कीटनाशक बेचने की छूट दी है? क्या इन कंपनियों को सरकार की ओर से इसके लाइसेंस दिए गए हैं? क्या ई-कॉमर्स कंपनियां मनचाहे दाम पर उर्वरक बेच सकती हैं? केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए।'

लाइसेंस की व्यवस्था इसलिए है कि कोई महंगे दामों पर किसानों को खाद न दे। ऐसा करने पर तत्काल उस रिटेलर का लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाता है। हालांकि, अमेरिकी कंपनी अमेजन के मामले में ऐसा नहीं है। अमेजन न सिर्फ बिना किसी लाइसेंस के गैरकानूनी तरीके देश में यूरिया की बिक्री कर रही है, बल्कि कृषि मंत्री उसे एंडोर्स भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं दिलचस्प तथ्य यह है कि इस स्टोर का उद्घाटन भी कल ही हुआ है और उद्घाटनकर्ता कोई और नहीं बल्कि नरेंद्र सिंह तोमर ही थे। तोमर ने उद्घाटन समारोह की तस्वीरें भी साझा की हैं। 

कॉरपोरेट की लूट की छूट में तोमर की हिस्सेदारी- केदार सिरोही

कृषि विशेषज्ञ केदार शंकर सिरोही ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण देते हुए कहा है कि आज किसानों के रक्षक ही उनके भक्षक बनने पर तुले हुए हैं। केदार सिरोही ने बताया कि फर्टिलाइजर आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में आता है। इसका रेट पूरी तरह से केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। उन्होंने पूछा कि इसके दर को विनियंत्रित कैसे किया जा सकता है? 20 रुपए की चीज डेढ़ सौ रुपए में बेचने की छूट कैसे दी जा सकती है? उन्होंने आरोप लगाया है कि कृषि मंत्री तोमर की कालाबाजारी और कॉरपोरेट को लूट की छूट देने में हिस्सेदारी है। सिरोही ने आगे कहा कि, 'सरकार अमेरिकी कंपनी को लाए या अफगान कंपनी को लाए, जब तक वेलफेयर की बात होगी, हमें कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन यहां तो किसानों को लूटने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।'

कृषि मंत्री को जेल भेजा जाए- अखिल भारतीय किसान संगठन

मामले पर अखिल भारतीय किसान संगठन ने कहा है कि कृषि मंत्री बड़े उद्योगपतियों के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। AIKS के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बादल सरोज ने इस बारे में कहा कि, 'कृषि मंत्री विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी भी कानून को तोड़ने के लिए तैयार हैं। वे पूरी निर्लज्जता के साथ उनका विज्ञापन कर रहे हैं। नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ एफआईआर कर उन्हें जेल भेजना चाहिए। कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ जो कार्रवाई होती है, वही कार्रवाई उनके खिलाफ भी होनी चाहिए।' 

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बादल सरोज ने आरोप लगाया है कि अमेजन के इस गैरकानूनी कृत्य में तोमर बराबर के साझेदार हैं। उन्होंने इसे शर्मनाक करार देते हुए कहा कि, 'कृषि मंत्री अपने ही देश के किसानों के खिलाफ साजिश और तिकड़म का हिस्सा बने हुए हैं। किसानों के खिलाफ उनकी कुत्सित नीयत उसी समय सामने आ गई थी जब उन्होंने काले कृषि कानूनों को पेश किया था।'