कहां गई भावांतर योजना, मूंग किसानों के साथ न्याय करे सरकार, दिग्विजय सिंह ने सीएम चौहान को लिखा पत्र

जब मूंग किसानों ने औने पौने भाव पर फसल बेच दी, तब पंजीयन शुरू कर रही है सरकार, यह किसानों के जले पर नमक छिड़कने जैसा: दिग्विजय सिंह

Updated: Jul 22, 2022, 05:29 PM IST

कहां गई भावांतर योजना, मूंग किसानों के साथ न्याय करे सरकार, दिग्विजय सिंह ने सीएम चौहान को लिखा पत्र

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग किसानों की समस्याओं से अवगत कराया है। सिंह ने कहा है कि जब किसानों ने औने पौने भाव पर फसल बेच दी तब पंजीयन शुरू हुई है, यह तो किसानों के जले पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा है कि अब भवांतर योजना कहां है?

सीएम चौहान को संबोधित पत्र में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने लिखा कि, 'प्रदेश के लाखों मूंग उत्पादक किसानों के साथ आप हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बड़ा अन्याय करने जा रहे है। गर्मी की मूंग लगाने वाले किसानों से फसल आने के दो माह बाद अब मूंग खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। यह किसानों के शोषण की इंतहा है। आप खुद को किसान पुत्र कहते हैं, पर क्या ये भी नही जानते कि प्रदेश के किसानों ने मई और जून माह में ही मूंग की फसल निकाल ली थी।'

सिंह ने आगे लिखा है कि, 'मई और जून में किसानों ने मंडी में और व्यापारियों को औने-पौने दाम में अपनी फसल बेच दी थी। किसान लगातार समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग करते रहे पर उनकी बात सुनने की जगह आप चुनावी राजनीति में लगे रहे। आप सीहोर जिले के निवासी हैं। सीहोर सहित पड़ोसी जिले देवास के मूँग उत्पादक किसानों द्वारा पांच से छः हजार रूपये मूल्य के बीच बेची गई थी। मूंग की फसल बेचे जाने की पर्चियां मुझे युवा किसान नेता अर्जुन आर्य ने भेजी है। जो पत्र के साथ संलग्न कर भेज रहा हूं।
कम से कम बुदनी, नसरूल्लागंज के किसानों का तो ध्यान रखते। जिन्होंने एक से दो हजार रूपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर अपनी फसल मजबूरी में मंडी जाकर बेची थी।'

राज्यसभा सांसद ने लिखा कि, 'कर्ज में डूबे किसानों को मजबूरी में मंडी जाकर अपनी फसल बेचनी पड़ी है। आपके कृषि मंत्री ने बिजली की समस्या से जूझते मूंग के किसानों के बारे में कहा था कि किसानों को बिजली दे दो नहीं तो ये निपटा देंगे। उस समय गर्मी के मौसम में बिजली कटौती चरम पर थी और किसान रात-रात जागकर मूंग में पानी देने के लिये परेशान था। जैसे-तैसे किसानों की फसल आयी तो आप समर्थन मूल्य पर खरीदी भूल गये। अब जब लघु और सीमांत किसान अपनी समस्त फसल बेच चुके हैं तब आप 20 जुलाई से समर्थन मूल्य पर पंजीयन का उपक्रम कर रहे है।'

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सरकार के इस प्रयास को कांग्रेस नेता ने किसानों के ‘‘जले पर नमक छिड़कने’’ जैसा करार दिया है। उन्होंने पूछा कि जब गत वर्ष 15 जून से मूंग की खरीदी प्रारंभ हुई थी तो इस वर्ष सवा माह की देरी क्यों की गई? जबकि हर वर्ष किसान 4 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा मूँग की पैदावार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल ये रकबा बढ़ता जा रहा है। एक तरफ महंगे बीज और कीटनाशक खरीदने से मूंग की फसल की लागत बढ़ रही है, दूसरी तरफ किसानों को सरकार वाजिब दाम नहीं दिला पा रही है। 

सिंह ने आगे लिखा है कि, 'किसान जानना चाह रहे हैं कि अब कहां गई आपकी भावांतर योजना? जिन किसानों ने सस्ते में मूँग की फसल बेची है उन्हें सरकार की तरफ से अंतर की राशि दी जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनके पास बची शेष फसल समर्थन मूल्य पर एक सप्ताह की समय-सीमा में खरीदकर तत्काल भुगतान कराया जाए। साथ ही जिन लघु और मध्यम किसानों ने कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम कीमत पर मंडी में मूँग बेची है, उन्हें भावांतर योजना के तहत अंतर की राशि दी जाए।