कृषि विभाग पर किसानों से धोखे का आरोप, सहकारी समितियों में बिक रहा गुणवत्ताहीन गेहूं का बीज

मप्र के किसानों को उन्नत बीज के नाम पर दिया जा रहा खराब क्वालिटी के गेहूं का बीज, पूसा तेजस की जगह पूसा पोषण नाम के घटिया किस्म के गेहूं के बीज से ठगा जा रहा है किसान, मौसम की मार और पैदावार दोनों में कमज़ोर

Updated: Oct 27, 2021, 09:59 PM IST

कृषि विभाग पर किसानों से धोखे का आरोप, सहकारी समितियों में बिक रहा गुणवत्ताहीन गेहूं का बीज
Photo Courtesy: wellkin.co.in

भोपाल। अपने उत्कृष्ट सोयाबीन और गेहूं के लिए मशहूर मध्य प्रदेश में किसान एक के बाद एक छलावे का शिकार हो रहा है। सोयाबीन के खराब बीजों और उससे उत्पादन पर पड़े असर के बाद अब गेहूं के बीजों में भी धोखाधड़ी के आरोप लग रहे हैं। यह आरोप किसी और पर नहीं बल्कि राज्य के कृषि विभाग पर लगा है। प्रदेश के किसान संगठनों ने सरकारी विभाग द्वारा पूसा तेजस की जगह पूसा पोषण नाम के बीज बेचे जाने पर सवाल खड़े किए हैं। कृषि जानकारों के मुताबिक पूसा पोषण हबहू पूसा तेजस सा दिखता है और नाम में भी अंतर कम है इसलिए किसान भ्रम में आ रहे हैं।

पूसा पोषण किस्म के बीज देखने में पूसा तेजस जैसे लगते जरूर हैं, लेकिन गुणवत्ता में कमज़ोर हैं। बाजार में सस्ता बिकने की वजह से किसान उसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं और सस्ते के चक्कर में लुट रहे हैं। जानकार मानते हैं कि पूसा तेजस जहां मौसम की मार आसानी से झेल लेता है और इसकी फसल विपरीत परिस्तिथियों में भी अच्छी होती है; वहीं  पूसा पोषण बीज खराब मौसम की मार बर्दाश्त नहीं कर पाता है।

कांग्रेस किसान संगठन के केदार सिरोही ने इसे सरकारी धोखाधड़ी करार दिया है। उनका आरोप है कि कृषि विभाग के माध्यम से किसानों से साथ धोखा किया जा रहा है। किसान नेता ने प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल से कार्रवाई की मांग की है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से भी सवाल किए हैं।

कृषि में हाइब्रिड बीजों पर काम कर चुके झाबुआ निवासी मांगीलाल काग जो कि एग्रीकल्चर में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं, बताते हैं कि वो अनुसंधान केंद्रों से फर्स्ट कैटेगिरी के बीज लाकर विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी खेती करवाते हैं और उन्नत बीजों को किसानों को उपलब्ध भी करवाते हैं। लेकिन उनके अनुसार भी गेहूं की पूसा पोषण वेरायटी कमज़ोर है। इस (HI 8663) बीज से गेहूं के पौधे की ऊंचाई ज्यादा होती है, लेकिन इसमें हल्की क्वालिटी की बालियां लगती हैं। जो कि मौसम की मार बर्दाश्त नहीं कर पातीं और तेज हवा के झोंकों में खड़ी फसल खेत में बिखर जाती है।

पूसा तेजस के पौधे की उंचाई में कम होती है, जिसकी वजह से पौधे पर मौसम की मार का कम असर होता है। तेजस बीजे से बने गेहूं की बालियां घनी होती हैं और कम समय में ज्यादा पैदावार देती है। पूसा तेजस से प्रति हेक्टेयर 55 से 60 क्विंटल उत्पादन होता है, जबकि अन्य वैरायटी के गेहूं में 50 से 52 क्विंटल ही उत्पादन हो पाता है। पूसा पोषण बीज की फसल 120 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसका इसके बारे में कहा जाता है कि अगर मौसम ठंडा रहता है और गर्मी नहीं आती है तो इसकी फसल पकने में 4-5 दिन ज्यादा लगते हैं। 

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मध्यप्रदेश के साथ-साथ पूसा तेजस की डिमांड दूसरे प्रदेशों में भी है। जबकि बाज़ार में इतना बीज मौजूद नहीं है। यही वजह है कि कृषि समितियां किसानों को अच्छी किस्म के बीज के नाम पर पूसा पोषण के बीज थमा रही हैं। केदार सिरोही का आरोप है कि यह सब कृषि विभाग के अफसरों की नाक के नीचे हो रहा है और अब अफसर भी अपने फायदे के लिए किसानों से धोखाधड़ी करने लगे हैं।  

बाजारों में पूसा तेजस किस्म की कमी है और डिमांड ज्यादा। यह बाजार में अन्य गेहूं की अपेक्षा करीब साढ़े तीन हजार रूपये ज्यादा में बिकता है। ऐसे में समितियों द्वारा सस्ता बीज बेचा जा रहा है। आरोप है कि यह सब कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत से कृषि मंडियां तेजस की जगह पूसा पोषण की किस्म किसानों को बीज के तौर पर दे रही हैं। 

खाद के लिए परेशान किसान अब नई फसल के बीज के लिे भी परेशान है। पूरे प्रदेश में कहीं मक्के की खरीद का सवाल है तो कहीं फसल बर्बादी से नुकसान का। इसी दौरान खाद के लिए रोजाना तौर पर प्रदेश के किसी न किसी अंचल में किसान विरोध पर है। मगर कृषि प्रदेश का ढ़िढ़ोरा पीटनेवाली सरकार इन दिनों चुनावी रण में है और कहीं कोी सुनवाई नहीं हो रही।