अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रूस की बड़ी कार्रवाई, वॉट्सऐप, फेसबुक, यूट्यूब पर लगाया बैन
रूस ने राष्ट्रीय इंटरनेट नियंत्रण के तहत WhatsApp सहित कई अमेरिकी डिजिटल प्लेटफॉर्म ब्लॉक कर दिए हैं। जिसके चलते करोड़ों यूजर्स प्रभावित हुए।
मास्को। रूस ने मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप और अन्य प्रमुख विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। रूस ने इन सभी ऐप को अपने राष्ट्रीय डोमेन नेम सिस्टम (DNS) से हटा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई 11 फरवरी को हुई जिसके बाद देश में व्हाट्सऐप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच अचानक बंद हो गई। इस फैसले से रूस के 10 करोड़ से अधिक यूजर्स प्रभावित हुए हैं।
रूसी इंटरनेट रेगुलेटर Roskomnadzor ने व्हाट्सऐप के डोमेन को राष्ट्रीय DNS से हटाया और ऐप स्टोर्स से भी इसे हटाने का निर्देश दिया है। इसका नतीजा यह हुआ कि जब यूजर संबंधित वेबसाइट या ऐप खोलने की कोशिश करते हैं तो सिस्टम IP एड्रेस ही नहीं ढूंढ पाता और स्क्रीन पर एरर मैसेज दिखाई देता है कि डोमेन मौजूद नहीं है। पहले जहां कुछ प्लेटफॉर्म्स की स्पीड कम कर दी जाती थी वहीं इस बार उन्हें पूरी तरह गायब हो गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है। 2025 से ही रूस ने चरणबद्ध तरीके से पाबंदियां लागू करनी शुरू की थी। शुरुआती चरण में वॉइस और वीडियो कॉल्स सीमित किए गए थे। अब पूर्ण ब्लॉकिंग तक बात पहुंच गई है। रोसकॉम्नाडजोर का आरोप है कि व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी Meta ने एंटी टेररिज्म जांच के लिए एन्क्रिप्टेड डेटा तक पहुंच देने से इनकार कर दिया था जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताया गया।
इस कार्रवाई के साथ रूस ने घरेलू सुपर ऐप मैक्स को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। वीके कंपनी द्वारा विकसित यह ऐप सरकारी सेवाओं से इंटीग्रेटेड है और देश के भीतर स्थित सर्वर्स पर संचालित होता है। क्रेमलिन इसे सॉवरेन इंटरनेट नीति का हिस्सा बता रहा है। जबकि, डिजिटल अधिकार समूहों का कहना है कि इससे सरकारी निगरानी का दायरा बढ़ सकता है। व्हाट्सऐप की ओर से प्रतिक्रिया में कहा गया है कि रूसी सरकार यूजर्स को एक नियंत्रित इकोसिस्टम की ओर धकेल रही है जबकि कंपनी लोगों को जोड़कर रखने की कोशिश कर रही है।
रूस में पहले ही फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रतिबंध लागू है और अब टेलीग्राम पर भी पाबंदियां बढ़ने की खबरें हैं। सोशल मीडिया के साथ साथ कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की वेबसाइट्स भी प्रभावित हुई हैं। इनमें BBC, Deutsche Welle और Radio Free Europe/Radio Liberty शामिल हैं। गुमनाम ब्राउजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला Tor Browser भी ब्लॉक कर दिया गया है।
रूस में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय DNS सिस्टम का उपयोग अनिवार्य है जो रोसकॉम्नाडजोर की निगरानी में सॉवरेन इंटरनेट कानून के तहत संचालित होता है। 2021 से ही वैकल्पिक DNS सेवाएं जैसे Google Public DNS के उपयोग को धीरे-धीरे सीमित किया जा रहा था। ताजा कदम को इंटरनेट नियंत्रण की दिशा में अब तक का सबसे कठोर निर्णय माना जा रहा है।
इस बीच भारत में भी व्हाट्सऐप को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। तीन फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और व्हाट्सऐप को स्पष्ट अंडरटेकिंग दाखिल करने को कहा कि यूजर डेटा का व्यावसायिक दोहन नहीं होगा और उसे किसी अन्य कंपनी के साथ साझा नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि यदि शर्तों का पालन नहीं हुआ तो देश में ऑपरेशनल शटडाउन का खतरा पैदा हो सकता है।
आर्थिक नजरिए से देखें तो दांव बेहद बड़ा है। भारत मेटा का सबसे बड़ा बाजार है। यहां 53.5 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं और यह कंपनी के कुल यूजर बेस का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। विश्लेषणों के अनुसार, व्हाट्सऐप और थ्रेड्स से 2026 में करीब 6 बिलियन डॉलर और 2027 में 19 बिलियन डॉलर तक की कमाई का अनुमान है। रूस तुलनात्मक रूप से छोटा बाजार है लेकिन वहां भी करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं।
मेटा ने 2026 में 162 से 169 बिलियन डॉलर तक का भारी निवेश विशेष रूप से एआई विकास पर करने की योजना बनाई है। ऐसे में भारत और रूस जैसे बड़े बाजारों में अनिश्चितता कंपनी की रेवेन्यू स्ट्रीम, यूजर ग्रोथ और ग्लोबल एआई व एडवरटाइजिंग रणनीति पर सीधा असर डाल सकती है।




