भोपाल के श्रमोदय स्कूल में खाने में मिली मरी छिपकली, 13 बच्चे बीमार, 11 अस्पताल में भर्ती

भोपाल के श्रमोदय आवासीय विद्यालय में भोजन में छिपकली मिलने के दावे के बाद 13 बच्चे बीमार हुए। 11 अस्पताल में भर्ती हैं।

Updated: Oct 12, 2026, 10:54 AM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मुगालिया छाप स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता और रसोई की स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। शनिवार रात छात्रावास में परोसी जा रही आलू की सब्जी में मरी हुई छिपकली मिलने का दावा किया गया। इसके बाद 13 विद्यार्थियों ने उल्टी और पेट दर्द की शिकायत की। जिनमें से 11 को जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की जानकारी मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान रसोई में कई खामियां मिलीं और नौ खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे गए।

यह मामला मुगालिया छाप नीलबड़ स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय के बालक छात्रावास का है। शनिवार रात विद्यार्थियों को खाना परोसा जा रहा था। इसी दौरान एक थाली में आलू की सब्जी के साथ मरी हुई छिपकली दिखाई देने की बात सामने आई। विद्यार्थियों की शिकायत के बाद भोजन बांटने का काम रोक दिया गया।

इसी दौरान करीब 13 बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली। उन्हें उल्टी और पेट दर्द की परेशानी होने पर रात करीब 10:30 बजे जेपी अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद छात्रावास में दोबारा भोजन बनवाया गया जिसे रात 11 बजे के बाद विद्यार्थियों को परोसा गया।

हालांकि, सब्जी में छिपकली मिलने के दावे और बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बीच सीधा संबंध अभी आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।

घटना की सूचना मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम रविवार को विद्यालय पहुंची। अधिकारियों ने भोजन तैयार करने की जगह और खाद्य सामग्री की स्थिति का जायजा लिया। शुरुआती निरीक्षण में रसोई के रखरखाव, स्वच्छता और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी कई कमियां सामने आईं।

रसोई की फर्श और दीवारों पर कई जगह टाइल्स और पत्थर टूटे हुए मिले। आटा गूंथने वाली मशीन के आसपास की सतह भी क्षतिग्रस्त थी। इसके अलावा भोजन परोसने वाली जगह पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं पाई गई।

निरीक्षण के दौरान पेस्ट कंट्रोल से संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिले। भोजन बनाने वाले कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र भी अधिकारियों को नहीं दिखाए जा सके। इन कमियों के सामने आने के बाद विद्यालय में खाद्य सुरक्षा के नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच के लिए कुल नौ नमूने एकत्र किए हैं। इनमें बेसन, कोकोनट पाउडर, पापड़, कतरन, तैयार दाल, मटर पनीर, तेल, बर्फी और मसूर दाल शामिल हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

विभाग ने कहा है कि रिपोर्ट और निरीक्षण में सामने आए अन्य तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के समय विद्यालय की प्राचार्य रत्ना दुबे, स्कूल का स्टाफ और कैटरिंग स्टाफ की ओर से राहुल त्रिवेदी मौजूद थे।

जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार जैन के मुताबिक, कुल 11 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें पांच बच्चे 14 वर्ष की उम्र के हैं। उन्होंने बताया कि सभी बच्चों की हालत ठीक है।

वहीं, रातीबड़ थाना प्रभारी रासबिहारी शर्मा ने कहा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की सूचना मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक ने भी निरीक्षण में खाद्य सुरक्षा और साफ सफाई से जुड़ी कई कमियां मिलने की पुष्टि की। उनके अनुसार, नौ खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने का दावा सही है या नहीं और भोजन की गुणवत्ता की निगरानी में कहां चूक हुई। साथ ही रसोई की क्षतिग्रस्त सतहों, अपर्याप्त रोशनी, पेस्ट कंट्रोल के रिकॉर्ड और कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्रों की अनुपलब्धता की भी पड़ताल की जाएगी।

आवासीय विद्यालय में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन भोजन तैयार किया जाता है। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता और भोजन वितरण की निगरानी में लापरवाही विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है। फिलहाल, प्रयोगशाला रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।