इंदौर में 50 से ज्यादा निजी बोरिंग के पानी में मिला ईकोलाई बैक्टीरिया, NGT ने दिए ट्रीटमेंट के निर्देश

इंदौर में 50 से अधिक निजी बोरिंग के पानी में ईकोलाई बैक्टीरिया मिलने पर NGT ने जांच के निर्देश दिए हैं।

Updated: Nov 08, 2026, 01:50 PM IST

इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 36 लोगों की मौत के बाद इंदौर में पानी की गुणवत्ता को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। शहर के अलग अलग इलाकों में 50 से अधिक निजी बोरिंग के पानी की जांच के दौरान ईकोलाई बैक्टीरिया पाए गए हैं। इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने नगर निगम, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभागों को मामले की जांच कर दूषित पानी के उपचार के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

जांच में सामने आया कि बैक्टीरिया की मौजूदगी केवल आवासीय इलाकों तक सीमित नहीं थी। सरकारी अस्पतालों, निजी छात्रावासों और विभिन्न संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले बोरवेल के पानी के नमूनों में भी ईकोलाई मिला है। रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर निगम ने प्रभावित स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए और लोगों को इन स्रोतों का पानी पीने से रोकने के लिए उन्हें असुरक्षित घोषित किया। कुछ जगहों पर दूषित पानी की आपूर्ति रोकने के लिए बोरिंग सील भी की गई हैं।

मामले की सुनवाई भोपाल स्थित एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में हुई। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और सुधीर कुमार चतुर्वेदी (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने संबंधित विभागों को दूषित पानी के संबंध में सामने आए तथ्यों की पड़ताल करने को कहा है। साथ ही बोरिंग के पानी में मिले बैक्टीरिया के प्रभाव को देखते हुए उसके उपचार और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

ट्रिब्यूनल ने विभागों को जांच के बाद रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अब संबंधित एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि निजी बोरिंग के पानी में ईकोलाई की मौजूदगी के पीछे क्या कारण हैं और दूषित जल से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

इंदौर में पेयजल की शुद्धता को लेकर पहले भी बड़ा संकट सामने आ चुका है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 36 लोगों की मौत के मामले ने शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और उसकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इस घटना को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट की ओर से गठित एक सदस्यीय जांच आयोग अपनी 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट भी अदालत में पेश कर चुका है।

अब निजी बोरिंग के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने और एनजीटी के हस्तक्षेप से इंदौर में जल गुणवत्ता की निगरानी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। शहर में बड़ी संख्या में लोग निजी बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में जांच का दायरा, दूषित जलस्रोतों की पहचान और उनके उपचार की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती होगी।