भोपाल में किसानों का हल्ला बोल, 4 लेयर बैरिकेडिंग तोड़ी, मांगें पूरी न होने पर CM हाउस का गेट तोड़ने की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी किसानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भोपाल में किसानों का आक्रोश सड़कों पर दिख रहा है और CJP की टीम पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किसान आंदोलित हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे हजारों किसानों ने अपनी मांगों को लेकर राजधानी में डेरा डाल दिया है। सीएम हाउस की ओर बढ़ रहे किसानों ने पुलिस की 4 लेयर बैरिकेडिंग तोड़ दी। रास्ते में किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर का घेराव किया। इस दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की में कुछ किसानों के कपड़े फट गए।
प्रदर्शनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीएम हाउस का गेट तोड़कर अंदर घुसेंगे। प्रदर्शन में शामिल बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार ने वादा तोड़ा है। हम भीख नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी किसानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भोपाल में किसानों का आक्रोश सड़कों पर दिख रहा है और CJP की टीम पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
प्रदर्शन स्थल पर कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध जताया। कुछ किसानों ने सड़क पर ही दाल-बाटी बनाकर लंच किया। किसानों के समर्थन में Gen-Z भी शामिल हुए और सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन किया। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक रोका, जिससे लोगों को परेशानी हुई।
आंदोलन को देखते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों से बातचीत के लिए मंत्रियों की कमेटी बनाई गई है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर किसानों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि प्रदेश में जहां अधिकांश उर्वरकों के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू है, वहीं सिंगल सुपर फॉस्फेट के संबंध में अलग व्यवस्था होने पर भी कई प्रश्न उठ रहे हैं। यदि इस व्यवस्था के कारण सब्सिडी वितरण, बिलिंग अथवा निगरानी प्रणाली में किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना है, तो केंद्र एवं राज्य सरकार को इसकी स्वतंत्र फोरेंसिक एवं वित्तीय जांच करानी चाहिए ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोका जा सके। हमारा आरोप है की एसएसपी उर्वरक को बिना ई-टोकन व्यवस्था के कई जिलो में लागु करने का मतलब कम्पनियों को फर्जी तरीके से सब्सिडी देने का रास्ता है जो एक बड़ा घोटाला हो सकता है।
किसानों की मांग
1. मध्य प्रदेश की संपूर्ण उर्वरक वितरण व्यवस्था का स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच आयोग गठित किया जाए।
2. पिछले 20 वर्षों में उर्वरक वितरण, आवंटन एवं जिलावार आपूर्ति का श्वेत पत्र जारी किया जाए।
3. सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा पर दी गई नियुक्तियों की समीक्षा कर पारदर्शी नीति लागू की जाए।
4. उर्वरक गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए।
5. ई-टोकन प्रणाली की वैज्ञानिक समीक्षा कर किसानों के हित में संशोधन किए जाएँ।
6. उर्वरक वितरण प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाए ताकि किसी एक व्यक्ति पर निर्भरता समाप्त हो।




