सर्वे के नाम पर जारी है बाढ़ पीड़ितों के साथ फर्जीवाड़े का खेल, भिंड में ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

भिंड के रौन तहसील के अंतर्गत पढ़ौरा गांव में बाढ़ के सर्वे से असंतुष्ट ग्रामीण धरने पर बैठ गए, उनका आरोप था कि नुकसान के सर्वे के दौरान बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है, 90 फीसदी तक का नुकसान झेलने वाले लोगों का दस फीसदी तक ही नुकसान दर्ज किया जा रहा है

Updated: Aug 29, 2021, 09:29 AM IST

सर्वे के नाम पर जारी है बाढ़ पीड़ितों के साथ फर्जीवाड़े का खेल, भिंड में ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

भिंड। ग्वालियर चंबल अंचल में आई बाढ़ के बाद हुए नुकसान का सर्वे सही ढंग से नहीं किया जा रहा है। जिस वजह से बाढ़ पीड़ितों तक उचित राहत नहीं पहुंच पा रही है। उचित राहत न मिलने और सर्वे में गड़बड़ी के विरोध में भिंड जिले में ग्रामीण धरना पर बैठक गए। राज्य मंत्री ओपीएस भदौरिया के पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया। 

भिंड जिले के रौन तहसील के अंतर्गत आने वाले पढौरा गांव के ग्रामीण नुकसान के सर्वे में हो रहे फर्जीवाड़े को लेकर धरने पर बैठ गए। करीब 50 की संख्या में शुक्रवार सुबह से लोगों ने धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के धरना प्रदर्शन की खबर राज्य मंत्री भदौरिया को लगी। इसके बाद भदौरिया तहसीलदार के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। 

राज्य मंत्री और तहसीलदार के आश्वासन और सर्वे के लिए कमेटी गठित करने के बाद किसानों ने 36 घंटे बाद अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि सर्वे में बाढ़ से हुआ असली नुकसान दर्ज नहीं किया जा रहा है। मसलन, जिस व्यक्ति को बाढ़ से 90 फीसदी नुकसान पहुंचा है, उसके लिए दस फीसदी नुकसान को ही दर्ज किया जा रहा है। 

ग्रामीणों के इस आरोप के बाद धरना स्थल पर पहुंचे तहसीलदार रामनिवास धाकड़ ने ग्रामीणों को नुकसान का सही सर्वे किए जाने का आश्वासन दिया। इसके लिए धाकड़ ने पांच सदस्य दल गठित करने और नुकसान का उचित मूल्यांकन करने का आश्वासन दिया। इसके बाद शनिवार शाम को ग्रामीणों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। 

भिंड जिले के 60 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आए थे। ग्वालियर चंबल में आई तबाही में भिंड जिला भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ। कांग्रेस पार्टी शुरू से ही इस बात की आशंका जता रही है कि पीड़ितों तक राहत पहुंचाने के लिए सही कार्यवाही नहीं हो रही है। लोगों के नुकसान का उचित मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है, जिस वजह से लोगों तक आर्थिक राहत नहीं पहुंच पा रही है।