प्राइवेट स्कूल संचालकों को भैंस के आगे बीन बजाना पड़ा महंगा, हिंसक हुई भैंस, प्रदर्शनकारियों पर किया हमला

मध्यप्रदेश के शाजापुर में प्राइवेट स्कूल संचालक कर रहे थे प्रदर्शन, स्कूलों को खोलने की थी मांग, भैंस को लाकर बजाना शुरू किया बीन, आवाज सुनकर भड़की भैंस ने महिला को पटका

Updated: Jul 03, 2021, 07:21 PM IST

प्राइवेट स्कूल संचालकों को भैंस के आगे बीन बजाना पड़ा महंगा, हिंसक हुई भैंस, प्रदर्शनकारियों पर किया हमला

शाजापुर। एक पुरानी कहावत है, 'भैंस के आगे बीन बजाए, भैंस खड़ी पगुराय' यानी भैंस के आगे बीन बजाने से भैंस पर इसका कोई असर नहीं होता। हालांकि, 21वीं सदी के आधुनिक भैंसों पर शायद ये कहावत लागू नहीं होती। अब भैंस के आगे बीन बजाना आपको भारी भी पड़ सकता है। इसका ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश के शाजापुर में देखने को मिला है, जहां भैंस के आगे बीन बजाना स्कूल संचालकों को महंगा पड़ गया।

दरअसल, शाजापुर के प्राइवेट स्कूल संचालक निजी स्कूलों को खोले जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। यह प्रदर्शन प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ प्रदेश अध्यक्ष दीपेश ओझा के नेतृत्व में हो रहा था, जिसमें सैंकड़ों संख्या में स्कूल संचालक शामिल हुए थे। इस दौरान कुछ ऐसा हुआ जिससे प्रदर्शनकारियों के बीच अफरातफरी मच गई।

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स्कूल संचालकों ने इस प्रदर्शन को खास बनाने के लिए भैंस के आगे बीन बजाने का कार्यक्रम रखा था। तय कार्यक्रम के अनुसार भैंस को भीड़ में पोस्टर के समीप लाया गया और एक दो लोगों ने बीन बजाना शुरू किया। लेकिन पोस्टर देख और बीन की आवाज सुनकर भैंस भड़क गई और उसने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। भैंस के हिंसक होते ही प्रदर्शनकारियों के बीच अफरातफरी मच गई। भैंस ने एक महिला स्कूल संचालक को पटक दिया वहीं कईयों को सिंह मारी। गनीमत ये रही कि भैंस मालिक ने स्थिति को भांपते हुए तत्काल भैंस को अपने काबू में ले लिया। 

सोशल मीडिया पर भैंस के भड़कने की वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। ट्वीटर यूजर्स इसे साझा करते हुए अजीबोगरीब बातें कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि चूंकि पोस्टर में भैंस की तस्वीर नहीं थी और प्रदर्शन के लिए उसे आमंत्रित नहीं किया गया था इस वजह से भैंस भड़क गई। बहरहाल, इस घटनाक्रम के बाद स्कूल संचालकों ने जिला कलेक्टर को सीएम शिवराज के नाम ज्ञापण सौंपा है।

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संचालकों का कहना है कि स्कूल बंद होने की वजह से अभिभावक फीस देनें से इनकार कर रहे हैं। प्रशासन की तरफ से भी कोई मदद मुहैया नहीं कराई जा रही है। प्रदेशाध्यक्ष ओझा ने कहा कि यदि सरकार मांग पूरी नहीं करती है तो 5 जुलाई से छठी से लेकर 12वीं तक के विद्यालय पूरे जिले में खोल दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि स्कूल नहीं खुलने की वजह से स्कूल संचालक बैंकों व वाहन की किस्त, बिजली बिल, मकान का किराया नहीं भर पा रहे हैं।