शहडोल में दूषित भोजन-पानी के खिलाफ आदिवासी छात्राओं का प्रदर्शन, मानवाधिकार आयोग पहुंची शिकायत

मानवाधिकार आयोग से प्रत्येक छात्रा को 50 हजार रुपये की अंतरिम क्षतिपूर्ति देने और छात्रावास में RO वाटर प्यूरीफायर तथा पारदर्शी मैस कमेटी स्थापित कराने की मांग की गई है।

Updated: Aug 20, 2026, 03:21 PM IST

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के कंचनपुर स्थित माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर (धुरवार आदिवासी कन्या छात्रावास) में रहने वाली छात्राओं को कथित तौर पर दूषित और कीड़े युक्त भोजन तथा अस्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराए जाने का मामला सामने आया है। छात्रावास की करीब 28 छात्राएं अपनी समस्याएं बताने के लिए करीब 8 से 9 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंची थीं। अब इस मामले को लेकर अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई है।

अधिवक्ता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि छात्रावास में रहने वाली आदिवासी छात्राओं को लंबे समय से घटिया और अस्वास्थ्यकर भोजन दिया जा रहा था। भोजन में कीड़े मिलने और स्वच्छ पेयजल तथा पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की बात भी शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन परिस्थितियों के कारण छात्राओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा था।

NHRC को भेजे गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि छात्राओं ने स्थानीय हॉस्टल प्रशासन, मैस प्रबंधन और वार्डन से कई बार अपनी समस्याओं की शिकायत की, लेकिन कथित तौर पर उनकी शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद करीब 28 छात्राएं भीषण गर्मी में छात्रावास से कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पैदल विरोध मार्च करने को मजबूर हुईं।

अधिवक्ता ने इसे छात्राओं के जीवन, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से संज्ञान लेने की मांग की है। शिकायत में शहडोल जिले के ब्यौहारी स्थित मॉडल स्कूल बालिका छात्रावास का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि पूर्व में वहां दूषित भोजन खाने से 15 से अधिक बालिकाएं फूड पॉइजनिंग का शिकार हुई थीं। शिकायतकर्ता ने इसे छात्रावासों में भोजन और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही का संकेत बताया है।

अधिवक्ता ने NHRC से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में मेस ठेकेदार और संबंधित वार्डन के खिलाफ FIR दर्ज कराने, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और वार्डन को निलंबित कर विभागीय जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा भोजन और पानी की लैब जांच रिपोर्ट तथा सभी 28 छात्राओं की मेडिकल रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत कराने की मांग की गई है। शिकायत में प्रत्येक छात्रा को 50 हजार रुपये की अंतरिम क्षतिपूर्ति देने और छात्रावास में RO वाटर प्यूरीफायर तथा पारदर्शी मैस कमेटी स्थापित कराने की भी मांग की गई है।