उज्जैन के आर्टिस्ट ने दाल-चावल से बनाया बापू का पोर्ट्रेट, गांधी जयंती पर दी अनोखी श्रद्धांजलि

उज्जैन के कलाकार रवि आकोदिया ने गांधी जयंती पर दाल और चावल के दानों से महात्मा गांधी का शानदार पोर्ट्रेट बनाया है।

Updated: Oct 02, 2026, 04:50 PM IST

उज्जैन। गांधी जयंती के मौके पर उज्जैन के कलाकार रवि आकोदिया ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए अनोखी कलाकृति तैयार की। उन्होंने दाल, चावल और अलग-अलग अनाज के दानों का इस्तेमाल कर कैनवास पर गांधी जी का पोर्ट्रेट बनाया। करीब 4 से 5 घंटे में तैयार हुई इस कलाकृति में 5 से 6 तरह की दाल, चावल और अन्य अनाज के लगभग 1 से 1.5 किलो दाने लगाए गए।

रवि ने इस कलाकृति की शुरुआत कैनवास पर गांधी जी का स्केच बनाकर की। इसके बाद पोर्ट्रेट के अलग-अलग हिस्सों में फेविकोल की मदद से अनाज के दाने चिपकाए गए। चेहरे और तस्वीर की बारीकियों को उभारने के लिए अलग-अलग प्रकार के दानों का इस्तेमाल किया गया जिससे बिना किसी पारंपरिक रंग के गांधी जी की तस्वीर तैयार हो गई।

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इस कलाकृति को तैयार करने के लिए रवि ने कोई विशेष या महंगा सामान नहीं खरीदा। उन्होंने घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाली दाल, चावल और दूसरे अनाज को ही कला का माध्यम बनाया। कैनवास और दानों को चिपकाने के लिए फेविकोल का इस्तेमाल किया गया।

रवि के मुताबिक, इस बार अनाज को माध्यम बनाने के पीछे सिर्फ कलात्मक प्रयोग नहीं था। प्रदेश में इस साल कम बारिश को देखते हुए उन्होंने गांधी जयंती पर ऐसी कलाकृति बनाने का विचार किया। जिससे अन्न की उपयोगिता और उसके सम्मान का संदेश भी लोगों तक पहुंच सके।

रवि आकोदिया पिछले करीब 10 सालों से गांधी जयंती के अवसर पर अलग-अलग माध्यमों से महात्मा गांधी की तस्वीर बनाकर श्रद्धांजलि देते आ रहे हैं। अब तक वे ड्राइंग, स्केचिंग, पेंटिंग और कैनवास सहित कई माध्यमों का प्रयोग कर चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने जमीन पर बालू और रेत का इस्तेमाल कर गांधी जी की तस्वीर बनाई थी। इस बार उन्होंने दाल और अनाज के दानों को अपनी कलाकृति का आधार बनाया।

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रवि पंजाब नेशनल बैंक में नौकरी करते हैं। नौकरी की व्यस्तता के बीच कला के लिए ज्यादा समय निकालना उनके लिए आसान नहीं होता लेकिन वे अपने शौक के लिए समय निकालकर हर साल गांधी जयंती पर कुछ अलग करने की कोशिश करते हैं। रवि का कहना है कि इन कलाकृतियों का उद्देश्य किसी पुरस्कार या सम्मान को हासिल करना नहीं है। 

उनके लिए यह आत्मसंतुष्टि और महात्मा गांधी के प्रति अपनी तरह से श्रद्धांजलि देने का माध्यम है। उनका मानना है कि गांधी जी को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है  बल्कि सत्य और अहिंसा जैसे उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान होगा।