LPG के बाद अब CNG भी हुई महंगी, टॉरेंट गैस कंपनी ने दरों में 2.50 रुपये प्रति KG का किया इजाफा
टॉरेंट गैस ने CNG की कीमतों में 2.50 रुपये प्रति किलो का इजाफा कर दिया है। 1 अप्रैल से कमर्शियल गैस सिलेंडर भी 195.50 रुपये महंगा हुआ है।
देश में ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच अब सीएनजी भी महंगी हो गई है। टॉरेंट गैस कंपनी ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की कीमत में 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा किया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब पहले से ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में उछाल देखा जा चुका है। कीमतों में बढ़ोतरी के चलते आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
कंपनी के इस फैसले का सीधा असर शहरों में रहने वाले आम उपभोक्ताओं और खासकर ऑटो रिक्शा चालकों पर पड़ा है। रोजाना सीएनजी पर निर्भर रहने वाले चालकों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण उनकी आमदनी पर भारी दबाव पड़ रहा है। कई चालकों ने बताया कि पहले जहां दिनभर की कमाई में बचत हो जाती थी। वहीं, अब उसी स्तर को बनाए रखने के लिए ज्यादा घंटे काम करना पड़ रहा है। जबकि, आम लोगों को भी आशंका है कि इस बढ़ोतरी के चलते आने वाले समय में पब्लिक ट्रांस्पोर्ट और कैब सेवाओं के किराए बढ़ सकते हैं।
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महंगाई की मार केवल सीएनजी तक सीमित नहीं है। 1 अप्रैल से देशभर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है। राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर अब 195.50 रुपये महंगा होकर 2,078.50 रुपये में मिल रहा है। छोटे 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। हालांकि, घरेलू एलपीजी की दरें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। वहीं, निजी कंपनी नायरा एनर्जी पहले ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा चुकी है। जबकि, सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक इनकी कीमतों में बदलाव नहीं किया है।
ऊर्जा बाजार में यह तेजी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से भी जुड़ी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति के रास्तों, खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है।
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ईंधन की कीमतों में इस व्यापक बढ़ोतरी का असर अब हर क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल महंगा होने से हवाई किराए बढ़ने की आशंका है। जबकि, परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आ सकता है। ऐसे में व्यवसाय और आम उपभोक्ता दोनों ही बढ़ती लागत के दबाव से जूझ रहे हैं।




