डिजिटल इंडिया कहीं जॉबलेस इंडिया न बन जाए, संसद में उठा AI से नौकरियों पर संकट का मुद्दा

राज्यसभा सांसद अशोक सिंह ने कहा कि AI अब भविष्य का खतरा नहीं है, बल्कि वर्तमान की सच्चाई है, क्योंकि ये तकनीकें जूनियर डेवलपर, टेस्टर और डेटा एंट्री के पदों को तेजी से ख़त्म कर रही हैं।

Updated: Feb 02, 2026, 01:38 PM IST

नई दिल्ली। देश में तेज़ी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल ने रोज़गार को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। इस तकनीकी बदलाव के बीच युवाओं की नौकरियाँ सुरक्षित रहेंगी या नहीं, इसे लेकर देश में नई बहस छिड़ गई है। संसद के बजट सत्र के दौरान मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद अशोक सिंह ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कहीं डिजिटल इंडिया ‘जॉबलेस इंडिया’ न बन जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से AI के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

राज्यसभा सांसद अशोक सिंह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं इस सदन के माध्यम से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। हमारे देश की मध्यमवर्गीय आकांक्षाओं की रीढ़ कहा जाने वाला IT सेक्टर आज गहरे संकट में है। मगर सरकार ‘सब चंगा सी’ के नारे में व्यस्त है। दशकों से यह सेक्टर देश में रोजगार का इंजन रहा है, लेकिन आज यह इंजन पूरी तरह ठप हो चुका है।'

उन्होंने आगे कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि देश की पांच बड़ी IT कंपनियों में नेट हायरिंग शून्य रही। इतिहास में पहली बार इन कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय घटाई गई। साल 2024-25 में इन टॉप 5 कंपनियों में करीब 18 हजार लोगों को नौकरी मिली थी, जबकि 2025 की शुरुआत में सिर्फ 1700 लोगों को रोजगार मिला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कैंपस प्लेसमेंट का अंत हो चुका है।

राज्यसभा सांसद ने चिंता जताते हुए कहा कि इंजीनियरिंग के लाखों स्टूडेंट्स ऑफ़र लेटर लेकर बैठे हुए हैं, क्योंकि पदों की भर्ती अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है। उन्होंने कहा कि IT सेक्टर में नौकरी का सपना अब हमारे युवाओं के लिए बुरा स्वप्न बनता जा रहा है। सिंह ने AI के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि AI अब भविष्य का खतरा नहीं है, बल्कि वर्तमान की सच्चाई है। यह तकनीक जूनियर डेवलपर, टेस्टर और डेटा एंट्री लेवल के पदों को तेजी से खत्म कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्पादकता बढ़ने के कारण कंपनियां अब 25 फीसदी कम वर्कफोर्स के साथ काम कर रही हैं।

कांग्रेस सांसद ने यह भी रेखांकित किया कि शहरों में रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि पिछले दस सालों में IT सेक्टर में सैलरी स्थिर रही है। एंट्री लेवल और मिड लेवल इंजीनियरों की सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। उन्होंने सरकार से पूछा कि एंट्री लेवल और मिड लेवल इंजीनियरों को बचाने के लिए कोई पॉलिसी या फंड है क्या? डिजिटल इंडिया कहीं जॉबलेस इंडिया न बन जाए, इसके लिए कोई रेगुलेटरी फ्रेमवर्क है क्या? लाखों इंजीनियरों के लिए क्या योजना है, जिनकी डिग्रियां AI के दौर में बेकार साबित हो रही हैं?

अशोक सिंह ने जोर देकर कहा, 'हम अपने युवाओं को डिजिटल इंडिया के नारों से नहीं पाल सकते हैं। उनकी नौकरियां AI द्वारा छीनी जा रही हैं। इसलिए हम मांग करते हैं कि सरकार रोजगार और AI के प्रभाव पर एक श्वेत पत्र जारी करे और हमारे तकनीकी कार्यबल को बचाने के लिए एक ठोस योजना पेश करे।'