सरकार महिला आरक्षण रोकने परिसीमन बिल लाई, कांग्रेस ने केंद्र की मंशा पर उठाए सवाल

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण के पक्ष में नहीं है। सरकार बार-बार महिला आरक्षण में अड़चनें लगा रही है, ताकि इसे टाला जा सके।

Updated: Apr 16, 2026, 05:18 PM IST

नई दिल्ली। परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर संसद में घमासान जारी है। विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण रोकने के लिए परिसीमन बिल लाई है। विपक्ष ने केंद्र की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो काम आसानी से हो सकता है, सरकार उसे पेचीदा बनाकर अटका रही है। अगर सरकार 2023 में हमारी बात सुनती तो 2024 में ही महिला आरक्षण लागू हो जाता।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है। सरकार महिला आरक्षण को सरल करे ताकि यह कानून पारित होने के साथ ही लागू हो जाए। इसी के साथ ये कानून लोकसभा की मौजूदा ताकत के साथ भी लागू हो। हम सरकार से यही कहना चाहते हैं कि इसे परिसीमन के साथ मत जोड़िए। हमने पहले भी यही बात कह चुके हैं। हमारी CPP चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी ने पहले भी कहा था कि महिला आरक्षण को परिसीमन से मत जोड़िए और इसे लोकसभा 2024 चुनाव के साथ ही लागू कर दीजिए। तब गृह मंत्री जी ने कहा था कि हमें महिला आरक्षण देने के लिए परिसीमन करना पड़ेगा। गृह मंत्री ने कहा था- जैसे ही लोकसभा चुनाव पारित हो जाएगा, उसे तुरंत बाद जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा और उसके बाद महिला आरक्षण लागू कर दिया जाएगा।'

कांग्रेस नेता ने पूछा कि अब 3 साल में ऐसी क्या बात बिगड़ गई कि सरकार खुद कह रही है कि अगली जनगणना और परिसीमन में काफी समय लगेगा। जबकि ये दोनों बातें बिल्कुल अलग हैं। गोगोई के मुताबिक इससे साफ है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण के पक्ष में नहीं है। सरकार बार-बार महिला आरक्षण में अड़चनें लगा रही है, ताकि इसे टाला जा सके। जो काम आसानी से हो सकता है, सरकार उसे पेचीदा बनाकर अटका रही है। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार 2023 में हमारी बात सुनती तो 2024 में ही महिला आरक्षण लागू हो जाता। हम आज भी कह रहे हैं आप महिला आरक्षण को जनगणना के साथ मत जोड़िए। सरकार महिला आरक्षण को संसद की वर्तमान 543 के साथ ही लेकर आए, हम आपका पूरा समर्थन करेंगे।'

गौरव गोगोई ने आगे कहा, 'सरकार के विधेयकों से साफ पता चल रहा है कि ये महिला आरक्षण का बिल नहीं है। ये बैकडोर के जरिए देश में परिसीमन करवाने का बिल है। मोदी सरकार की मंशा परिसीमन की है, जिसके ऊपर महिला आरक्षण का लेबल लगा दिया गया है। एक बात साफ हो गई है कि मोदी सरकार न महिला आरक्षण के पक्ष में है और न जातिगत जनगणना के। 2023 में मोदी सरकार ने कहा था कि जनगणना होगी, परिसीमन होगा, फिर महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। 2026 में मोदी सरकार कह रही है जनगणना से पहले हमें महिला आरक्षण लाने की कोशिश करनी चाहिए। इस बीच फर्क सिर्फ इतना ही आया है कि INDIA गठबंधन और नेता विपक्ष राहुल गांधी जी के दबाव में मोदी सरकार जातिगत जनगणना करवाने के लिए मजबूर हो गई, लेकिन सच्चाई ये है कि मोदी सरकार कभी भी जातिगत जनगणना करवाने के पक्ष में नहीं थी।'

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, 'मोदी सरकार हमारे दबाव में जातिगत जनगणना करवाने को मजबूर हुई, लेकिन उससे पहले सरकार के लोग हमें 'अर्बन नक्सल' और 'देशद्रोही' कहते थे। महिला आरक्षण को लागू करने के लिए मोदी सरकार परिसीमन को बुल्डोज कर रही है। संविधान में लिखा है कि जनगणना के बाद परिसीमन होगा, लेकिन अब सरकार संविधान के आर्टिकल को ख़त्म कर खुद को ताकत दे रही है। सवाल यह है- सदन में सीटें बढ़ने की संख्या कहां से आई, क्या ये संख्या नागपुर से आई, किसी पार्लियामेंट्री रिपोर्ट से आई या फिर आसमान से आ गिरी। सरकार खुद से कैसे तय कर रही है कि सीटें कितनी होंगी। मोदी सरकार ने परिसीमन को अपना हथियार बना लिया है। जम्मू-कश्मीर और असम का उदाहरण सबके सामने है।'

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन कमीशन ने 2001 की जनगणना को आधार बनाया और असम में चुनाव आयोग ने 2011 की जनगणना को आधार बनाया। ये कितनी शर्मनाक बात है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण के नाम पर महिलाओं का राजनीतिक दुरुपयोग कर रही है। कुल मिलाकर- यह बिल महिला विरोधी है, जातिगत जनगणना विरोधी है, संविधान विरोधी है और संघीय ढांचे का भी विरोधी है। गोगोई ने कहा कि हमारे संविधान के निर्माताओं की यह मंशा नहीं थी कि परिसीमन किसी राजनीतिक दल का हथियार बने। परिसीमन की मंशा थी कि जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ेगी, उस हिसाब से लोकसभा क्षेत्रों और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन हो ताकि लोगोंको प्रशासनिक सुविधा मिले। लेकिन अब परिसीमन को कैसे हथियार बनाया जा रहा है, उसके लिए जम्मू-कश्मीर और असम का उदाहरण सबके सामने है।