इंदौर में 98 फीसदी पानी के सैंपल फेल, लैब रिपोर्ट में मिले मल-मूत्र के खतरनाक बैक्टीरिया

कांग्रेस ने दावा किया कि 3 फरवरी से 28 फरवरी के बीच इंदौर के सात विधानसभा क्षेत्रों के 29 वार्डों से 240 पानी के नमूने लिए गए, जिनमें से 98 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए।

Updated: May 29, 2026, 06:57 PM IST

इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर अपने दूषित जल के लिए चर्चा में है। शहर के जलस्रोतों में गंदगी का पता तब चला जब भागीरथपुरा में दूषित जल से 36 लोगों की मौत हो गई। अब खबर आई है कि सिर्फ भागीरथपुरा ही नहीं बल्कि शहर के 98 फीसदी क्षेत्रों में दूषित पानी का सप्लाई किया जा रहा है।

शुक्रवार को इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नगर निगम और राज्य सरकार की व्यवस्थाओं सवाल खड़े किए। कांग्रेस द्वारा कराए गए एक वैज्ञानिक 'जल सर्वे' और लैब रिपोर्ट का हवाला देते हुए पटवारी ने कहा कि इंदौर की जनता को नलों के माध्यम से पानी नहीं, बल्कि 'धीमा जहर' परोसा जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने बताया कि कांग्रेस ने इंदौर के 7 विधानसभा क्षेत्रों के 29 वार्डों से 240 पानी के नमूने एकत्र किए थे। 'यूनिग्लोब एनालिटिका' की लैब रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जांचे गए पानी के 98% नमूने गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह फेल पाए गए हैं। पानी में 'ई-कोलाई' (E. coli) और 'कोलीफॉर्म' बैक्टीरिया की भारी मात्रा की पुष्टि हुई है, जो सीधे तौर पर पीने के पानी की पाइपलाइनों में सीवरेज का गंदा पानी मिलने का प्रमाण है।

रिपोर्ट में क्लोराइड और सल्फेट जैसे तत्वों की अधिक मात्रा सामने आई, जो डायरिया, बुखार और पेट संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।पटवारी ने कहा कि शहर में दूषित पानी पीने से अब तक 36 मासूम नागरिकों की असामयिक मौत हो चुकी है। भागीरथपुरा सहित कई क्षेत्रों में फैली इस त्रासदी के बावजूद नगर निगम प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमृत योजना और ड्रेनेज सुधार के नाम पर खर्च किए गए 7,000 करोड़ रुपए का बजट विकास के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है।

पटवारी ने सवाल किया कि हजारों करोड़ रुपये पानी और जल परियोजनाओं पर खर्च होने के बावजूद आखिर लोगों के घरों तक सीवरेज मिला पानी कैसे पहुंच रहा है? पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले उनके हाथ कटे हुए दिखाई देते थे, अब इस मुद्दे पर उनकी जुबान भी कट गई है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस द्वारा पेश की गई रिपोर्ट गलत है तो महापौर उन्हें अदालत में ले जाएं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट भारत सरकार से प्रमाणित उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं की जांच पर आधारित है और इसकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।